काम में हमेशा डूबे रहते हैं, आपको हो सकती हैं ये दिक्कतें

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लंदन। कोई दिन ऐसा नहीं होता, जब हम काम नहीं करते। सुबह से लेकर देर रात तक हम अपने लैपटॉप में जूझे रहते हैं। हममें में ज्यादातर को इस वजह से अपने परिवार के साथ वक्त बिताने का मौका ही नहीं मिल पाता है। हम पैसा कमाकर खुश होते हैं, लेकिन ये नहीं समझ पाते कि कितनी बड़ी चीज हम खो रहे हैं और इसका हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ रहा है। तो चलिए, जानते हैं कि लगातार काम में जूझे रहकर हम आखिर क्या गंवाते हैं।
 
बेटी के साथ बेहतरीन वक्त गुजार नहीं सका वो

अंग्रेजी अखबार द गार्जियन में ओलिवर बर्कमैन की रिपोर्ट मरलिन मन नाम के शख्स की आपबीती पर है। इसमें लिखा गया है कि मरलिन को ई-मेल को स्ट्रीमलाइन करने के बारे में एक किताब लिखने का काम मिला। दो साल तक मरलिन इस किताब को लिखने में बिजी रहा। दो साल बाद एक दिन उसे पता चला कि इस किताब को लिखने की धुन में वो इतना खोया था कि बेटी के साथ वो जिंदगी के सुनहरे पल नहीं गुजार सका। मरलिन ने इस बारे में अपने ब्लॉग में भी लिखा और किताब लिखना बंद कर दिया।

व्यस्त रहिए, पर ज्यादा नहीं

द गार्जियन में छपा लेख बताता है कि व्यस्त तो सभी को रहना चाहिए, लेकिन दिक्कत तब होती है, जब हम ब्रेक नहीं लेते। हम सोते नहीं, चलना-फिरना बंद कर देते हैं और दिनचर्या को बिल्कुल बदलकर ऐसा कर देते हैं कि परिवार के बाकी सदस्यों के लिए हमारे पास वक्त ही नहीं बचता। हम सिर्फ अपनी डेस्क पर बैठे मिलते हैं, कम्प्यूटर में वेबसाइट देखते रहते हैं और इससे न हमें खुशी होती है और न ही हमारी प्रोडक्टिविटी ही बढ़ती है।

क्या कहते हैं साइकोलॉजिस्ट

साइकोलॉजिस्ट माइकल गटरिज के हवाले से द गार्जियन में छपे लेख में कहा गया है कि जो लोग बस काम, काम और काम करने में भरोसा रखते हैं, वे बाकी जरूरी चीजों से लगातार दूर होते जाते हैं। गटरिज का ये भी कहना है कि इस वजह से हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ता है। गटरिज ने सलाह दी है कि चाहे आपके पास कितना भी काम हो, लेकिन टहलने जरूर जाइए। कॉफी शॉप में बैठिए या किसी दूसरे तरह से ब्रेक जरूर लीजिए।
 
नामचीन लोग भी लेते थे ब्रेक

किताब ‘रेस्ट: ह्वाई यू गेट मोर डन ह्वेन यू वर्क लेस’ में एलेक्स सूजंग और किम पैन ने लिखा है कि चार्ल्स डिकेन्स, गैब्रियल गारसिया मारकेज और चार्ल्स डार्विन भी अपने काम से ब्रेक लेते थे। ये सभी नामचीन लोग दिन भर में पांच घंटे या उससे कम ही काम करते थे, लेकिन फिर भी वे सफल रहे। इस किताब में कहा गया है कि कम वक्त तक दफ्तर में काम करके भी हम किस तरह अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।

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