जो सामाजिक रूप से होते हैं डिस्कनेक्ट उन्हें धर्म देता है जीने का उद्देश्य

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मिशिगन। ऐसे लोग जो सामाजिक नहीं हैं या समाज से अलग-थलग रहते हैं, उन्हें धर्म जीने का उद्देश्य देता है। अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है। इस रिसर्च को जर्नल ऑफ पर्सनालिटी में पब्लिश किया गया है।

क्या कहना है शोधकर्ताओं का

मिशिगन यूनिवर्सिटी के टोड चैन का कहना है कि इस रिसर्च से हमने ये जानने की कोशिश की है कि जो लोग समाज से अलग रहना पसंद करते हैं वो क्या सोचते हैं। सामाजिक रूप से डिस्कनेक्ट होने की इस रूढ़िवादी सोच में हमेशा से मुझे इंटरेस्ट रहा है। समाज से अलग वही लोग रहना पसंद करते हैं जो किसी कमजोर रिश्ते में हैं या अपने को अलग महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों को समाज में रहने या बाहर जाकर लोगों से मिलने के लिए सुझाव देने की बजाय मैंने ये जानने की कोशिश की कि ऐसे लोग इस कमी को पूरा करने के लिए किस चीज का सहारा लेते हैं।

क्या कहती है पुरानी रिसर्च

पिछले शोध से पता चला है कि जो लोग सामाजिक रूप से डिस्कनेक्ट हैं, वे भगवान और पालतू जानवरों जैसी चीजों में मानव-जैसे गुणों को देखते हैं, लेकिन यह काफी हद तक स्पष्ट नहीं हो पाया। शोधकर्ताओं ने 19,775 अमेरिकी लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इन लोगों ने तीन राष्ट्रीय-प्रतिनिधि अध्ययनों में भाग लिया था। उन्होंने पाया कि जो लोग महसूस करते हैं कि उन्हें दोस्तों से हमेशा मदद मिलती और दोस्त उनका समर्थन करते हैं, ऐसे लोगों को अपने जीवन का अर्थ मालूम है। जो लोग सामाजिक रूप से डिस्कनेक्ट महसूस करते हैं, वो अपने जीवन का अर्थ खो देते हैं। ऐसे लोगों को धर्म के सिद्धांतों से हिम्मत मिलती है और भगवान पर उनका विश्वास भी बढ़ जाता है। ऐसे लोगों को धर्म से ही जीने का उद्देश्य मिलता है।

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