रिटायरमेंट से पहले इन अहम मामलों पर फैसला सुना सकते हैं CJI दीपक मिश्रा

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नई दिल्ली। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं, लेकिन इससे पहले वह कई चर्चित मामलों की सुनवाई करेंगे। इनमें वो मामले भी शामिल हैं, जिनमें उनकी अगुवाई में बेंच ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। ये फैसले एक के बाद एक कभी भी आ सकते हैं। आइए जानते हैं ये चर्चित मामले कौन-कौन से हैं

अयोध्‍या विवाद

इस लिस्ट में पहले स्थान पर है अयोध्या का राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 13 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 7 साल बाद 11 अगस्त, 2017 को सुनवाई शुरू की थी। अब तक 15 सुनवाई हो चुकी हैं। इसी मामले के तहत एक बड़ा सवाल उठा है कि 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। इस फैसले के दोबारा परीक्षण के लिए इसे सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के सामने भेजा जाए या नहीं, 20 जुलाई को इस पर फैसला सुरक्षित रखा गया है। इस फैसले के बाद ही टाइटल सूट पर विचार होगा।

आधार की अनिवार्यता मामला

सुप्रीम कोर्ट में लंबित महत्वपूर्ण मसलों की लिस्ट में दूसरे स्थान पर आधार की संवैधानिकता का सवाल है। आधार को चुनौती देने वाली नौ याचिकाओं पर पांच जजों की संविधान पीठ ने 10 मई को फैसला सुरक्षित रखा था। संविधान पीठ ने 17 जनवरी से सुनवाई शुरू की थी। चार महीने के दौरान 38 दिन मैराथन सुनवाई हुई। इस मामले में कोर्ट को फैसला करना है कि आधार संवैधानिक है या नहीं? फैसला आने तक सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के अलावा बाकी सभी केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं में आधार की अनिवार्यता पर रोक लगाई गई है। इनमें मोबाइल सिम व बैंक खाते भी शामिल हैं।

SC/ST प्रमोशन में आरक्षण

सुप्रीम कोर्ट में लंबित संवेदनशील मुद्दों की लिस्ट में तीसरे नंबर पर एससी-एसटी वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण का केस है। देशभर के एससी/एसटी समुदाय की इस फैसले पर नजर है। दरअसल, एसी-एसटी वर्ग को सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए दायर याचिका पर कोर्ट को तय करना है कि इसमें रोड़ा बने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2006 के एक फैसले पर पुनर्विचार किया जाए या नहीं।सुप्रीम कोर्ट की सविधान पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर 30अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि केंद्र और राज्य सरकारों ने जहां सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण की वकालत की है, वहीं याचिकाकर्ताओं ने इसका विरोध किया है।

व्‍यभिचार से जुड़ी IPC की धारा 497 

9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार से संबंधित IPC की धारा 497 पर फैसला सुरक्षित रखा था। पांच जजों का संविधान पीठ तय करेगी कि यह धारा अंसवैधानिक है या नहीं, क्योंकि इसमें सिर्फ पुरुषों को आरोपी बनाया जाता है महिलाओं को नहीं। यह धारा कहती है कि पति की अनुमति से महिला किसी अन्य से संबंध बना सकती है। याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कानून का समर्थन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि विवाहित महिला अगर किसी विवाहित पुरुष से संबंध बनाती है तो सिर्फ़ पुरुष ही दोषी क्यों, जबकि महिला भी अपराध की जिम्मेदार है ?

सबरीमाला मंदिर मामला

केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 3 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा था कि महिलाओं को उम्र के हिसाब प्रवेश देना संविधान के मुताबिक है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिकल 25 सभी वर्गों के लिए बराबर है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा मंदिर हर वर्ग के लिए है,किसी खास के लिए नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान इतिहास पर नहीं चलता, बल्कि ये ऑर्गेनिक और वाइब्रेंट है।

दागियों के चुनाव लड़ने पर रोक

5 साल से ज्यादा की सजा वाले अपराध में आरोप तय होने के बाद आरोपी नेता को चुनाव लड़ने से वंचित करने, राजनीतिक दल बनाने से रोकने और ऐसे लोगों को टिकट देने वाले दलों की मान्यता रद्द करने पर सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना है। पांच जजों की संविधान पीठ ने केंद्र से पूछा था कि क्या चुनाव आयोग को ये शक्ति दी जा सकती है कि वो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को चुनाव में उतारें तो उसे (उस उम्मीदवार को) चुनाव चिह्न देने से इनकार कर दे? केंद्र की ओर से AG  केके वेणुगोपाल ने इसका विरोध किया, कहा कि ये चुने हुए प्रतिनिधि ही तय कर सकते हैं, यह काम कोर्ट का नहीं।

समलैंगिकता

समलैंगिक संबंधों को अपराध करार देने वाली आईपीसी की धारा 377  की वैधता को चुनौती देते हुए इसे असंवैधानिक घोषित करने के लिए याचिका दायर की गई थी। 17 जुलाई को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पांच जजों की संवैधानिक पीठ को इस पर फैसला सुनाना है। हालांकि पीठ ने यह साफ किया था कि इस कानून को पूरी तरह से निरस्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यह दो समलैंगिक वयस्कों द्वारा सहमति से बनाए गए यौन संबंध तक ही सीमित रहेगा। पीठ ने कहा कि आप बिना दूसरे की सहमति से अपने यौन झुकाव को नहीं थोप सकते।

अदालती कार्यवाही का सीधा प्रसारण

24 अगस्त को राष्ट्रीय महत्व के मामलों में अदालत की कार्यवाही के सीधे प्रसारण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने कहा कि अदालती कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी और ये ओपन कोर्ट का सही सिद्घांत होगा। हालांकि CJI दीपक मिश्रा ने कहा कि अयोध्या और आरक्षण जैसे मुद्दों की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं होगी। इस दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा,‘हम खुली अदालत को लागू कर रहे हैं। ये तकनीक के दिन हैं। हमें पॉजीटिव सोचना चाहिए और देखना चाहिए कि दुनिया कहां जा रही है।’

दाऊदी बोहरा समुदाय में खतना प्रथा 

अहम मामलों की सूची में मुस्लिम दाऊदी बोहरा समुदाय की एक महिला द्वारा सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई एक याचिका है, जिसमें इस समुदाय में बच्चियों के खतना को चुनौती दी गई है। दरअसल मुस्लिम दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं के खतना की प्रथा को क्रूरता बताते हुए समुदाय की एक महिला ने इसे खत्म करने की याचिका दायर की थी। इस पर कोर्ट को फैसला सुनाना है।

नेताओं की बतौर वकील प्रैक्टिस

सुप्रीम कोर्ट में नेताओं के वकील के रूप में प्रैक्टिस करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। इस मामले पर भी कोर्ट इस महीने फैसला सुना सकता है। कोर्ट को यह तय करना है कि नेता एक अधिवक्‍ता के रूप में प्रैक्टिस कर सकते हैं या नहीं, याचिकाकर्ता ने इस पर रोक लगाने की मांग की है।

 

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