कहीं भी कभी भी आ जाती है नींद, आप भी तो नहीं इस बीमारी के शिकार !

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लखनऊ। क्‍या आपको हमेशा सुस्‍ती बनी रहती है, हर समय उनींदे बने रहते हैं ?  कितना भी सो लें, लेकिन नींद पीछा नहीं छोड़ती है ? यही नहीं, दिन हो या रात, कहीं भी बैठे-बैठे या बातें करते-करते आप सो जाते हैं ? अगर ऐसा होता है तो यह सामान्‍य स्थिति नहीं है, वास्‍तव में ये एक बीमारी के लक्षण हैं। इस बीमारी का नाम है नॉर्कोलेप्‍सी।

क्‍या है नार्कोलेप्‍सी ?

दरअसल, नार्कोलेप्सी नींद से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जिसमें मरीज़ कभी भी अचानक सो जाता है। अकसर वो यह भी नहीं देखता कि वह कहां बैठा हुआ है। इस बीमारी में मरीज कभी भी बैठे-बैठे, यहां तक कि हंसते हुए या रोते हुए भी, सो जाता है। वास्‍तव में यह बीमारी क्रॉनिक सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी होती है और यह दिमाग में मौजूद उन रसायनों को प्रभावित करती है जो सोने और जागने के चक्र को नियंत्रित करते हैं। यह बीमारी ज्‍यादातर 15 से 25 साल की उम्र के लोगों को अपनी गिरफ्त में लेती है। इनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं।

क्‍या है इस बीमारी का कारण ?

हालांकि वैज्ञानिक अभी तक इस बीमारी का ठोस कारण पता लगाने में असफल रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि अनुवांशिकी और वायरस के संयोग से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ब्रिटेन की नेशनल हेल्‍थ सर्विस के मुताबिक, यह एक दिमागी बीमारी है। अधिकतर मामलों में यह देखा गया है कि बीमार व्यक्ति में हायपोक्रेटीन हार्मोन की कमी होती है। यह हार्मोन दिमाग को जगाए रखने में मदद करता है। जब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इस हार्मोन को पैदा करने वाली कोशिकाओं को प्रभावित करती है  तो यह बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है।

क्‍या हैं इस बीमारी के लक्षण ?

हालांकि इस बीमारी के लक्षण मरीज़ में लम्बे समय से हो सकते हैं, लेकिन बीमारी का पता बहुत दिनों बाद चलता है। नार्कोलेप्सी के मुख्य लक्षण हैं, हमेशा बहुत ज्यादा सुस्‍ती महसूस करना और किसी भी समय कहीं भी सो जाना। मरीज को जागने और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है। इनके अलावा इस बीमारी के कई और लक्षण हैं, जैसे –

कैटाप्लैक्सी : यह प्रक्रिया नींद से जुड़ी है, जिसमें मांसपेशियां किसी होने वाले अटैक की तरह स्थिर हो जाती हैं।

स्लीप पैरालिसिस :  इस स्थिति में जिसमें व्यक्ति सोने और जागने के वक़्त कुछ देर के लिए बोलने और चलने में असमर्थ हो जाता है। हालांकि ऐसा बहुत ही कम मामलों में होता है।

हिप्नोपौमपिक हैल्युसिनेशन : यह वो स्थिति है जब मरीज़ अर्धनिद्रा में होता है और उसे डरावने सपने आते हैं जिन्हें वो हकीकत मान लेता है।

आटोमैटिक बिहेवियर :  इस अवस्था में व्यक्ति नींद में होता है लेकिन वो ऐसे काम करता है जैसे वो जाग रहा हो।

क्‍या है इस बीमारी का इलाज ?

डॉक्‍टरों के अनुसार, इस बीमारी का कोई पक्‍का इलाज नहीं है, लेकिन कुछ दवाइयों की मदद से इसके असर और प्रभाव को कम करने की कोशिश की जाती है। जीवनशैली में बदलाव कर निश्चित अंतराल पर सोने की कोशिश करने को दिन में नींद के दौरे कम करने का बेहतर तरीका माना जाता है। डॉक्‍टर कुछ दवाइयों की मदद से भी मरीज को दिन में जगाने की कोशिश करते हैं। इस बीमारी से ग्रस्‍त मरीज को बहुत सावधान रहने की आवश्‍यकता होती है, ताकि उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचे।

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