गुरुग्राम के लैंड डील मामले में फंसे रॉबर्ट वाड्रा, जानिए एफआईआर में क्या हैं आरोप

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  • जमीन हथियाने के मामले में हरियाणा के पूर्व सीएम भूपिंदर हुड्डा और डीएलएफ पर भी केस

नई दिल्‍ली। हरियाणा के गुरुग्राम में 10 साल पुराने जमीन खरीद-फरोख्‍त के घोटाले में यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने शनिवार (1 सितंबर) को इस मामले में दो कंपनियों डीएलएफ और ओंकारेश्‍वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ भी खेड़कीदौला थाने में मामला दर्ज किया है। बता दें कि हरियाणा के नूंह निवासी सुरिंदर शर्मा की ओर से इस मामले में की गई शिकायत के आधार पर यह केस दर्ज किया गया है।

किन धाराओं में दर्ज हुई है एफआईआर ?

इस जमीन घोटाले में सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा और पूर्व सीएम हुड्डा के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120 बी (आपराधिक साजिश), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471 (फर्जी दस्‍तावेज का असली के रूप में इस्‍तेमाल) और भ्रष्‍टाचार रोकथाम अधिनियम की धारा 13 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। उधर, इस मामले पर रॉबर्ट वाड्रा का कहना है, ‘चुनाव का मौसम आ रहा है, तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, इसलिए लोगों का ध्‍यान इन मुद्दों से भटकाकर मेरे पुराने मामले पर दिया जा रहा है। इसमें कुछ नया नहीं है।’

क्‍या कहा गया है शिकायत में ?

पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि रॉबर्ट वाड्रा ने वर्ष 2007 में 1 लाख रुपये की पूंजी के साथ स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी नामक रजिस्‍टर्ड कराई थी। आरोप है कि वर्ष 2008 में स्काईलाइट ने गुरुग्राम के सेक्टर 83  में 3.5 एकड़ जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 7.50 करोड़ रुपए में चेक के जरिए भुगतान कर खरीदी, लेकिन यह चेक फर्जी था। इस जमीन की रजिस्‍ट्री के लिए 45 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया था। इस जमीन को खरीदने के बाद वाड्रा ने अपने प्रभाव का इस्‍तेमाल करते हुए इसका लैंड यूज बदलवाकर कॉलोनी के विकास के लिए कॉमर्शियल करा लिया। उस वक्त भूपेंद्र सिंह हुड्डा राज्य के मुख्यमंत्री थे और उनके पास आवास एवं शहरी नियोजन विभाग भी था।

करोड़ की जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ में बेची

पुलिस को दी गई शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि वाड्रा ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 7.50 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन को जून 2008 में रियल एस्‍टेट कंपनी डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया था। वाड्रा पर इस डील के जरिए गैरकानूनी रूप से मुनाफा कमाने का आरोप है। यही नहीं, नियमों को दरकिनार कर गुरुग्राम के वजीराबाद में भी डीएलएफ को बाजार से कम कीमत पर 350 एकड़ जमीन बेचने का आरोप है, जिससे इस रियल एस्‍टेट कंपनी को 5,000 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचा। हालांकि वाड्रा ने हमेशा अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने भी भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार कर दिया था।

जांच के लिए बना था आयोग

हरियाणा में बीजेपी नेतृत्व वाली मनोहर लाल खट्टर सरकार ने 14 मई, 2015 को इस जमीन घोटाले की जांच के लिए सेवानिवृत्‍त न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा की अध्‍यक्षता में एक आयोग का गठन किया था। ढींगरा आयोग ने अगस्‍त 2016 में अपनी 182 पेज की रिपोर्ट हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर को सौंप दी थी। हालांकि अभी तक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट में नौकरशाही के कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं।

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