जलेबी खाते-खाते तरुण सागर बने जैन मुनि, 1981 में छोड़ दिया था घर

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नई दिल्ली। अपने कड़वे प्रवचनों की वजह से जैन मुनियों में अनोखे कहे जाने वाले तरुण सागर का निधन हो गया है। इसके साथ ही उनकी जिंदगी से जुड़ी तमाम यादें उनके शिष्य याद कर रहे हैं। हम यहां आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह जलेबी खाते वक्त तरुण सागर को जैन मुनि बनने का ख्याल आया।
 
जलेबी खाते वक्त जैन मुनि बनने की चाहत

जैन मुनि तरुण सागर का असली नाम पवन कुमार जैन था। 1981 में एक दिन वो जलेबी खा रहे थे। तब दुकान के पास ही एक जैन मुनि का प्रवचन चल रहा था। वो जैन मुनि कह रहे थे कि हर व्यक्ति चाहे तो भगवान बन सकता है। यही सुनकर तरुण सागर ने जैन मुनि बनने का फैसला किया और 13 साल की उम्र में 1981 में घर छोड़ दिया। 20 साल की उम्र में तरुण सागर दिगंबर जैन मुनि बन गए।

जब विशाल डडलानी ने मांगी तरुण सागर से माफी

जैन मुनि तरुण सागर ने हरियाणा और मध्यप्रदेश विधानसभा में भी प्रवचन दिया था। हरियाणा विधानसभा में प्रवचन देने पर बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार विशाल डडलानी ने अच्छे दिनों और बिना कच्छे को लेकर तरुण सागर पर निशाना साधा। तरुण सागर ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उनके भक्तों ने विशाल को निशाने पर लिया। इसके बाद विशाल ने बाकायदा तरुण सागर से मुलाकात कर अपने कान पकड़कर माफी मांगी थी।

ये हैं तरुण सागर से जुड़ी खास जानकारियां

-तरुण सागर (पवन कुमार जैन) का जन्म मध्यप्रदेश के दमोह में 26 जून 1967 को हुआ था। 20 साल की उम्र में वो दिगंबर मुनि बने। उनकी दीक्षा छत्तीसगढ़ में हुई थी।
-समाज के अलग-अलग वर्गों को एकजुट करने के लिए उन्होंने तमाम कोशिश की।
-मध्यप्रदेश सरकार ने 6 फरवरी 2002 को उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा दिया था।
-साल 2003 में उन्हें इंदौर में राष्ट्र संत की उपाधि मिली थी।
-उन्हें कर्नाटक में हुई एक धार्मिक सभा में क्रांतिकारी की उपाधि दी गई थी।
-तरुण सागर ने ‘कड़वे प्रवचन’ नाम की किताब भी लिखी। वो तमाम मुद्दों पर बेबाक राय देते थे।

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