नीरव का कारनामा : 1.3 करोड़ के एक ही हीरे को 4 कंपनियों को लाखों डॉलर में बेचा

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नई दिल्ली। अमेरिका में बैंकरप्‍सी को सौंपे गए 165 पेज के डोजियर में हीरा कारोबारी नीरव मोदी द्वारा भारत के अबतक के सबसे बड़े बैंक घोटाले से जुड़ी कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं, जिन्‍हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे। इसमें एक ऐसे हीरे की कहानी सामने आई है, जिसे नीरव मोदी ने दुनिया के अलग-अलग देशों में अपनी ही कंपनियों में कई बार खरीदा और बेचा। यही नहीं, हर बार इसकी कीमत में लाखों डॉलर का अंतर दिखाया गया। कहा जा रहा है कि इसी बिक्री को दिखाकर नीरव मोदी ने पीएनबी से कर्ज लिया।

अमेरिका में हुई जांच में खुलासा

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में नीरव मोदी की कंपनियों की जांच में इन तथ्यों का खुलासा हुआ है। अमेरिका के सिक्युरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन और न्याय विभाग ने यह जांच की है। इसके अनुसार, तीन कैरेट के एक हीरे को नीरव मोदी की संदिग्ध कंपनियों को चार बार भेजा गया। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नीरव ने 2011 से 2017 के बीच कुल 21.38 करोड़ डॉलर के फर्जी बिल तैयार किए। इन्‍हीं बिलों के आधार पर वह लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LOU) के जरिए पंजाब नेशनल बैंक से लोन लेता रहा।

कैसे हुई हीरे की बिक्री

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2011 में इस हीरे को सबसे पहले अमेरिकी नीरव की कंपनी फायरस्टार डायमंड को बेचा गया। इसके बाद इसे हांगकांग स्थित फैंसी क्रिएशन नाम की एक शेल कंपनी को भेजा गया। तब इसकी कीमत 11 लाख डॉलर बताई गई। इन दोनों फर्मों का मालिक परोक्ष तौर से खुद नीरव मोदी ही था। दो हफ्ते बाद इसी हीरे को सोलर एक्सपोर्ट कंपनी को भेजा गया और इसकी कीमत 1.83 लाख डॉलर दिखाई गई। सोलर एक्सपोर्ट भी नीरव मोदी फैमिली ट्रस्ट की पार्टनरशिप वाली कंपनी थी, जो फायरस्टार डायमंड के स्वामित्व के अंतर्गत आती थी। इसके बाद इसे संयुक्त अरब अमीरात में कथित तौर पर मोदी की शेल कंपनी वर्ल्ड डायमंड डिस्ट्रीब्यूशन को बेचा गया और इस बार इसकी कीमत 12 लाख डॉलर बताई गई।

कैसे लिया लोन

जांचकर्ता जॉन जे कारनी के मुताबिक, दरअसल ताबड़तोड़ खरीदारी नीरव के प्लान का हिस्सा था, जिसके तहत मोदी और उसके सहयोगियों ने एक साल में 4 बिलियन डॉलर उधार लिया। भारत में 20 शेल कंपनियों के समूह के द्वारा डायमंड और दूसरी ज्‍वेलरी के आयात का दिखावा किया गया। 2011 से 2017 के बीच कुल 213.8 मिलियन डॉलर की राउंड ट्रिपिंग की गई और इसी अवधि में पीएनबी घोटाले को अंजाम दिया गया। इस दौरान बने बिलों को शॉर्ट टर्म लोन लेने के लिए पीएनबी को दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद लोन से मिली रकम का इस्तेमाल नीरव मोदी के लाइफस्टाइल और कारोबार इकाइयों में किया गया। नए लोन का इस्तेमाल पुराने लोन को चुकाने में भी किया गया।

 

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