गौरक्षकों के हमलों का असर, भारत से चमड़ा उत्पादों का निर्यात हुआ कम

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नई दिल्ली। भारत से चमड़ा उत्पादों का काफी निर्यात होता था, लेकिन 2015 के बाद से इसमें कमी आई है। वजह है गौरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा। आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2016-17 में चमड़ा उत्पादों के निर्यात में 3 फीसदी से ज्यादा की कमी हुई। वहीं, 2017-18 की पहली तिमाही में निर्यात का आंकड़ा घटकर 1.30 फीसदी रहा। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2013-14 में भारत से चमड़ा उत्पादों के निर्यात में 18 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी।

गौरक्षा के नाम पर हिंसा बनी वजह !

विशेषज्ञों के मुताबिक गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा की वजह से चमड़ा उत्पादों का निर्यात कम हुआ है। साल 2012 और 2013 में गौरक्षा के नाम पर सिर्फ एक-एक घटनाएं हुई थीं। साल 2014 में हिंसा की ऐसी 3 घटनाएं हुईं। जबकि, 2017 में गौरक्षा के नाम पर हिंसा की 37 घटनाएं सामने आईं।
 
मोहम्मद अखलाक की हत्या से हुई थी शुरुआत

बता दें कि यूपी के ग्रेटर नोएडा में मोहम्मद अखलाक सैफी को बछड़ा काटने का आरोप लगाकर 2015 में बकरीद के दूसरे दिन मार डाला गया था। इस घटना के बाद 2015 में ही 10 और लोगों की मौत गौरक्षा के नाम पर 12 मामलों में की गई हिंसा में हुई। 2016 में 24 घटनाओं में 8 लोग मारे गए। जबकि, 2017 में 11 और 2018 में अब तक 7 लोगों की जान गौरक्षकों ने ली है।

मुसलमानों-दलितों पर सबसे ज्यादा हमले

गौरक्षा के नाम पर जिन लोगों पर हमले हुए, उनमें 55 फीसदी मुसलमान, 11 फीसदी दलित और 20 फीसदी अज्ञात धर्म या जाति के हैं।

बीजेपी शासित राज्यों में सबसे ज्यादा घटनाएं

आंकड़े बताते हैं कि गौरक्षा के नाम पर हमलों की सबसे ज्यादा 51 फीसदी घटनाएं बीजेपी शासित राज्यों में हुईं। जबकि, कांग्रेस शासित राज्यों में ऐसी सिर्फ 11 फीसदी घटनाएं ही हुईं।

25 लाख लोगों के रोजगार पर संकट

चमड़ा उद्योग में करीब 25 लाख लोग काम करते हैं। इनमें से ज्यादातर मुसलमान और दलित हैं। भारत में पूरी दुनिया में बनने वाले जूतों में से 9 फीसदी बनते हैं। इसके अलावा चमड़े से बनने वाले अन्य उत्पादों में भारत में बनने वाले उत्पादों की हिस्सेदारी 12.93 फीसदी है। गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा की वजह से भारत का चमड़ा उद्योग जहां सिकुड़ रहा है। वहीं, पड़ोसी देश चीन ने चमड़ा उत्पादों का निर्यात 3 फीसदी बढ़ा लिया है। 2014-15 में भारत ने 6.49 बिलियन डॉलर के चमड़ा उत्पादों का निर्यात किया था। ये 2016-17 में घटकर 5.66 बिलियन डॉलर हो गया। यानी पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले चमड़ा उत्पादों के निर्यात में 12.78 फीसदी की कमी आई।

यूपी में इतनी हैं टैनरियां

यूपी में कुल 429 टैनरियां हैं। इनमें से ज्यादातर में कामकाज या तो कम हो गया है या कच्चे माल के अभाव में ये बंद हो गई हैं। टैनरियों पर गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा का असर तो है ही, इसके अलावा गंगा और अन्य नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के अभियान के तहत भी सरकारी कार्रवाई हुई है। सूबे में सिर्फ 342 टैनरियों में प्रदूषण रोकने के उपाय हुए हैं। जबकि, 47 टैनरियों में प्रदूषण नियंत्रक यंत्र होने के बाद भी नदियों में प्रदूषक तत्व जा रहे हैं। 2019 में इलाहाबाद में कुंभ होने वाला है। ऐसे में उन्नाव और कानपुर के अलावा गंगा और यमुना के किनारे बनी टैनरियों को सरकार बंद कराने की तैयारी भी कर रही है। ऐसे में मौजूदा वित्तीय वर्ष में चमड़ा उत्पादों का निर्यात और भी गिर सकता है।

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