जन्माष्टमी : इस बार भी दो दिन मनाई जाएगी जन्‍माष्‍टमी, जानिए कैसे करें पूजा और व्रत

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लखनऊ। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हर साल रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद की कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को मनाई जाती है। इस साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2 सितम्बर 2018 दिन रविवार को मनाई जाएगी, वहीं उदया तिथि अष्टमी एवं उदय कालिक रोहिणी नक्षत्र को मानने वाले वैष्णव जन 3 सितम्बर सोमवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत पर्व मनाएंगे।इस दिन भगवान श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिए भक्तजन उपवास रखते हैं और श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं।

क्‍यों मनाई जाती है जन्‍माष्‍टमी

मान्‍यता है कि माता देवकी ने मथुरा स्थित कंस के कारागार में श्रीकृष्‍ण को आधी रात में जन्‍म दिया था। कंस के डर से देवकी के पति वासुदेव ने श्रीकृष्‍ण को टोकरी में रखकर रातोंरात बाबा नंद और माता यशोदा के घर नंदगांव पहुंचा दिया था। जन्म के समय स्थिर लग्न वृष का उदय हो रहा था एवं चन्द्रमा का संचरण भी वृष राशि में ही हो रहा था। इसी कारण प्रत्येक वर्ष वृष लग्न एवं वृष राशि मे श्री कृष्ण जन्मोत्सव विश्वभर में मनाया जाता है।

कैसे करें जन्‍माष्‍टमी की पूजा ?

व्रत का संकल्प लें और उसके नियम ग्रहण करें। भगवान श्रीकृष्‍ण की पूजा नीशीथ काली यानी आधी रात को की जाती है। जन्‍माष्‍टमी की पूजा शुरू करने से पहले रात 11 बजे दोबारा स्‍नान कर लें। उसके बाद देवकीजी, वासुदेवजी, षष्ठी देवी और श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित करें। साथ ही माता लक्ष्मी की भी मूर्ति भी स्थापित कर लें। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। इसके बाद पालने को सजा लें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछा कर लड्डू गोपाल की मूर्ति स्‍थापित कर पूजा प्रारंभ करें। कुछ लोग इस दिन चंद्रमा को अर्घ्‍य भी देते हैं।

और क्‍या करें इस दिन

जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण मंदिर में जाकर भगवान को पीले फूल चढ़ा सकते हैं। भगवान से प्रार्थना करें। इससे धनलाभ के योग प्रबल बनते हैं।

जन्माष्टमी के दिन दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करें।

जन्माष्टमी को तुलसी की पूजा करें और ‘ओम नम: वासुदेवाय’ मंत्र का जप करते हुए 11 बार परिक्रमा करें। इससे आपको कर्ज से मुक्ति मिलेगी।

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