संविधान के अनुच्छेद 35-A पर अब अगले साल सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान में जम्मू-कश्मीर से संबंधित अनुच्‍छेद 35-A पर सुनवाई एक बार फिर टाल दी है। अब अगली सुनवाई 19 जनवरी, 2019 को होगी। इससे पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार (31 अगस्‍त) को इस मामले को संविधान पीठ में भेजने पर फैसला कर सकता है। इसके मद्देनजर कश्मीर में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई थी। श्रीनगर में अलगाववादियों के बंद को देखते हुए सेना भी मुस्तैद हो गई थी।

क्‍यों टली सुनवाई ?

प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ के समक्ष केन्द्र की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि राज्य में आठ चरणों में सितंबर से दिसंबर के दौरान स्थानीय निकाय के चुनाव होने वाले हैं और वहां कानून व्यवस्था की समस्या है। इस पर तीन जजों की पीठ ने कहा, ‘ठीक है, चुनाव हो जाने दीजिए।’

किसने दायर की है याचिका ?

एक गैर सरकारी संस्था ‘वी द सिटीजन’ की तरफ से सर्वोच्‍च न्‍यायाल में यह याचिका वर्ष 2014 में दायर की गई थी। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 35ए को असंवैधानिक बताते हुए इसे खत्म करने की मांग की गई है। उधर, जम्‍मू कश्‍मीर के स्थानीय लोगों को इस बात का भय है कि अगर यह कानून निरस्त किया जाता है या फिर इसमें किसी तरह का कोई बदलाव होता है तो फिर बाहरी लोग आकर जम्मू-कश्मीर में बस जाएंगे। बता दें कि इससे पहले 27 अगस्त को भी सर्वोच्च अदालत में अनुच्छेद 35 A को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई होनी थी,  जो नहीं हो सकी। उससे पहले 6 अगस्त को हुई सुनवाई में जजों की कमेटी ने 35-A पर कई तरह के सवाल पूछे थे। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि ये मामला संविधान पीठ में जाना चाहिए या नहीं ?

क्‍या कहा एएसजी ने ?

शुक्रवार को मामले पर सुनवाई शुरू होते ही अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य में 4,500  सरपंचों और दूसरे स्थानीय निकाय के पदों के लिए आठ चरणों में सितंबर से दिसंबर के दौरान चुनाव कराए जाने हैं। उन्होंने कोर्ट से सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि यदि स्थानीय निकाय के चुनाव नहीं हुए तो इसके लिए आवंटित 4,335 करोड़ रुपये का इस्तेमाल इस मद में नहीं हो सकेगा। उन्होंने राज्य की मौजूदा कानून व्यवस्था की ओर भी पीठ का ध्यान आकर्षित किया। अटार्नी जनरल ने कहा कि बड़ी संख्या में अर्द्धसैनिक बल वहां पर तैनात हैं। वहां शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव हो जाने दीजिए और इसके बाद जनवरी या मार्च में इन याचिकाओं पर सुनवाई की जा सकती है। यह विषय बहुत ही संवेदनशील है।

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