प्रदूषण का कुपोषण से है सीधा रिश्ता, 2050 तक भारत में इतने लोग होंगे कुपोषित

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नई दिल्ली। प्रदूषण और कुपोषण का सीधा रिश्ता है और अगर प्रदूषण अगर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो साल 2050 तक और 29 करोड़ लोग कुपोषण का शिकार हो सकते हैं।

प्रदूषण का कुपोषण से यूं है रिश्ता

एक रिसर्च के मुताबिक वातावरण में जितनी कार्बन डाइऑक्साइड घुलेगी, उतना ही खेती को नुकसान होगा। खेती को इस गैस से इतना नुकसान होता है कि इसमें पोषण के लिए जरूरी जिंक, लोहा और प्रोटीन कम हो जाता है। इससे 2015 तक और 17 करोड़ लोगों में जिंक की कमी हो जाएगी। जबकि, 12 करोड़ से ज्यादा लोग प्रोटीन की कमी से होने वाले कुपोषण का शिकार होंगे।

इन इलाकों में होगा सबसे ज्यादा असर

रिसर्च के मुताबिक कुपोषण का सबसे ज्यादा असर फिलहाल खाद्य असुरक्षा वाले भारत जैसे देशों में है और साल 2050 तक इन्हीं इलाकों में कुपोषण बढ़ सकता है। कुपोषण वाले इलाकों में भारतीय उप महाद्वीप के अलावा उत्तरी अफ्रीका और मध्य-पूर्व के देश हैं।

खेती को ये नुकसान भी होंगे

प्रदूषण बढ़ने से वातावरण में भी बदलाव होगा। कभी भीषण गर्मी होगी, कभी बारिश सबकुछ बहा ले जाएगी, तो कभी सूखे से फसलें बर्बाद होंगी। जाहिर है, जब फसलें बर्बाद होंगी, तो लोग कुपोषण का शिकार भी होंगे। बता दें कि फसलों से इंसान को जरूरत का 81 फीसदी लौह तत्व और 63 फीसदी जिंक मिलता है। जिंक और लौह तत्वों की कमी से शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है। बता दें कि पहले हुई रिसर्च से साबित हुआ था कि वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़ने से चावल, गेहूं और बाजरा में लौह तत्व, जिंक और प्रोटीन में 3 से 17 फीसदी की कमी हो जाती है।

भारत में सबसे ज्यादा कुपोषण

रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि भारत में सबसे ज्यादा कुपोषण है। अंदाजा ये लगाया गया है कि साल 2050 तक भारत में और 5 करोड़ लोगों के शरीर में जिंक की कमी हो जाएगी। साथ ही 5 करोड़ महिलाओं और बच्चों को लौह तत्व की कमी से एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ सकता है।

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