आसान सवाल हल करने में होती है दिक्कत, दिमाग पर प्रदूषण हो सकता है इसकी वजह

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लंदन। एक नई रिसर्च से पता चला है कि हवा में प्रदूषण से सिर्फ दिल और फेफड़ों को ही खतरा नहीं होता। इसका दिमाग पर भी इतना असर पड़ता है, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

दिमाग की गति हो जाती है धीमी
लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी की रिसर्च बताती है कि वायु प्रदूषण से दिमाग की एनालिटिकल क्षमता कम हो जाती है। यहां तक कि इसके असर की वजह से लोगों को बात करते वक्त शब्द ढूंढने और आसान से सवाल हल करने में भी दिक्कत होती है। लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर बारबरा माहेर के मुताबिक रिसर्चर्स को दिमाग के नमूनों में वायु प्रदूषण करने वाले लाखों कण मिले। इन कणों की संख्या एक मिलीग्राम दिमाग के ऊतक में लाखों की तादाद में थीं। इन कणों की वजह से दिमाग को नुकसान पहुंचने की आशंका होती है।

इस वजह से दिमाग तक पहुंच रहे वायु प्रदूषक
लैंंकेस्टर यूनिवर्सिटी की रिसर्च के मुताबिक इंसान के दिमाग में चुंबकीय आयरन ऑक्साइड का कंपाउंड मैग्नेटाइट मिला। ये कण उद्योगों से हवा में पहुंचते हैं। बता दें कि अल्जाइमर के मरीजों के दिमाग में भी काफी बड़ी तादाद में मैग्नेटाइट मिलता है। इस नई रिसर्च से पर्यावरण प्रदूषण के नए जोखिम सामने आए हैं।

क्या कहते हैं रिसर्चर
रिसर्च करने वाली टीम की प्रमुख प्रोफेसर माहेर का कहना है कि सांस के जरिएथ शरीर में प्रदूषण वाले कण पहुंचते हैं और इससे सांस की नली से होते हुए फेफड़ों तक कण पहुंच जाते हैं। इसके अलावा इन प्रदूषक कणों के एक हिस्सा स्नायु तंत्र से होते हुए दिमाग तक जा पहुंचता है। प्रोफेसर माहेर का कहना है कि मैग्नेटिक प्रदूषक कणों के दिमाग में पहुंचने से आवाज और संकेतों का दिमाग तक पहुंचना मुश्किल होता है। इससे अल्जाइमर जैसी बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है।

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