स्वामी के मालदीव पर ‘हमले’ संबंधी बयान से भारत सरकार ने किया किनारा

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नई दिल्‍ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को अपने ही एक सांसद के बयान से असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्‍यम स्‍वामी द्वारा मालदीव को लेकर दिए गए बयान से भारतीय विदेश मंत्रालय ने खुद को अलग कर लिया है। स्वामी ने कहा था कि यदि मालदीव के आगामी राष्ट्रपति चुनावों में गड़बड़ी होती है तो भारत को मालदीव पर हमला बोल देना चाहिए।

क्‍या कहा था स्‍वामी ने ?

बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने शुक्रवार को ट्वीट किया था, ‘अगर मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव में वहां धांधली होती है तो भारत को उसके ऊपर आक्रमण कर देना चाहिए।’ स्वामी ने यह बात कोलंबो में मालदीव के निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद से भेंट के बाद कही थी। अब भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने स्वामी के बयान को उनकी निजी सोच बताया है। उन्‍होंने कहा, ‘स्वामी द्वारा ट्विटर पर व्यक्त किए विचार उनके व्यक्तिगत विचार हैं और यह भारत सरकार के विचार को प्रतिबिंबित नहीं करता।’

पिछले हफ्ते पूर्व राष्‍ट्रपति से मिले थे स्‍वामी

बता दें कि सुब्रमण्‍यम स्वामी ने पिछले हफ़्ते कोलंबो में मोहम्मद नशीद से मुलाक़ात की थी। इस भेंट के दौरान नशीद ने स्वामी से आशंका जताई थी कि मालदीव में 23 सितंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में वर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की पार्टी द्वारा गड़बड़ी की जा सकती है। इसके बाद ही स्‍वामी ने ट्वीट कर लिखा – ‘अगर मालदीव में चुनाव के दौरान गड़बड़ी होती है तो भारत को हमला बोल देना चाहिए।’

मालदीव में इमरजेंसी के बाद रिश्‍तों पर असर

गौरतलब है कि भारत और मालदीव के रिश्ते अब्‍दुल्‍ला यामीन द्वारा गत फरवरी माह में लगाए गई इमरजेंसी के बाद से खराब हुए हैं। जब जनवरी-फरवरी के महीने में मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने विरोधी नेताओं की रिहाई के आदेश दिए तो यामीन सरकार ने आदेश को मानने से इनकार करते हुए शीर्ष अदालत के जजों को गिरफ्तार कर लिया था। यामीन ने विरोधी नेताओं पर फिर से मुकदमा चलाने का आदेश दिया और देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने मालदीव सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए यामीन से विरोधी दलों के नेताओं को रिहा करने की अपील की थी। भारत ने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल देने के खिलाफ है, लेकिन मालदीव की यामीन सरकार को लोकतंत्र की मूल भावनाओं को समझना चाहिए।

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