भारत में पहली बार जैव ईंधन से विमान ने देहरादून से दिल्ली तक भरी उड़ान

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देहरादून जैव ईंधन से चलने वाले विमान ने देश में पहली बार देहरादून से दिल्‍ली तक सफलतापूर्वक परीक्षण उड़ान भरी। विमानन कंपनी स्पाइस जेट के टर्बोपोर्प क्यू-400 विमान को उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार (27 अगस्‍त) को यहां के जौलीग्रांट एयरपोर्ट से रवाना किया। इसी के साथ भारत भी अमेरिका और ऑस्‍ट्रेलिया के साथ जैव ईंधन से विमान उड़ाने वाले चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो गया है। परीक्षण उड़ान में करीब 20 लोग विमान में सवार थे। 

कैसे तैयार हुआ जैव ईंधन ?

स्‍पाइस जेट के 72 सीटों वाले इस विमान में जिस जैव ईंधन का इस्‍तेमाल किया गया, वह जैट्रोफा के तेल और हाइड्रोजन के मिश्रण से बनाया गया है। ये ईंधन प्रदूषण रहित है। परीक्षण के लिए काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) और देहरादून के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) ने 400 किलो बायो जेट फ्यूल तैयार किया था। इसके लिए IIP में प्लांट लगाया गया है। छत्तीसगढ़ से बायोफ्यूल डेवलपमेंट अथॉरिटी के जरिए जैट्रोफा का बीज खरीदा गया। इस फ्लाइट में 75 फीसदी एविएशन टर्बाइन फ्यूल और 25 फीसदी बायोफ्यूल था। दिल्ली में विमान के पहुंचने के वक्‍त हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, नितिन गडकरी, धर्मेन्‍द्र प्रधान, डॉ. हर्षवर्द्धन और जयंत सिन्हा मौजूद थे।

जैव ईंधन से पहले कहां उड़े हैं विमान ?

  • जनवरी 2018 में आस्ट्रेलियाई कैरियर क्वांटास के ड्रीमलाइनर बोइंग 787-9 विमान ने लॉस एंजिलिस और मेलबर्न के बीच उड़ान भरी थी। 15 घंटे की इस उड़ान के लिए मिश्रित ईंधन का उपयोग किया गया था। इसमें 10 प्रतिशत जैव ईंधन मिलाया गया था।
  • वर्ष 2011 में अलास्का एयरलाइंस ने जैव ईंधन से चलने वाले कुछ विमान शुरू किए थे, जिसके ईंधन में 50 फीसदी खाद्य तेल का इस्तेमाल किया गया था।
  • इसके अलावा केएलएम ने भी वर्ष 2013 में कुछ जैव ईंधन वाले विमान न्यूयॉर्क और एम्सटर्डम में शुरू किए थे।

क्‍या है भारत का लक्ष्‍य

दरअसल, भारत तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है, इसीलिए जैव ईंधन का इस्‍तेमाल बढ़ाने की योजना है। इसी महीने 10 अगस्त को जैव ईंधन दिवस के मौके पर दिल्ली में एक कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति जारी की थी। इसमें आनेवाले चार सालों में एथेनॉल का उत्पादन तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। अगर ऐसा होता है तो तेल आयात के खर्च में 12 हजार करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है।

क्‍या होगा फायदा ?

बता दें कि जैव ईंधन सब्जी के तेलों, रिसाइकल ग्रीस, काई, जानवरों के फैट आदि से बनता है। दरअसल, एयरलाइंस इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) नामक ग्लोबल एसोसिएशन ने विमानन इंडस्ट्री से पैदा होने वाले कॉर्बन को 2050 तक 50 फीसदी कम करने का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जैव ईंधन के इस्तेमाल से एविएशन क्षेत्र में उत्सर्जित होने वाले कार्बन को 80 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

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