वेनेजुएला में महंगाई से हालात बेकाबू, एक करोड़ में मिल रहा एक प्लेट खाना

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साओ पाउलो। महंगाई की मार क्या होती है, ये आजकल दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में देखने को मिल रहा है। यहां करेंसी की हालत बेहद खराब हो गई है। नोटों की कीमत सादे कागज से ज्‍यादा नहीं रह गई है। महंगाई हज़ारों गुना बढ़ गई है। हालत यह है कि यहां के करोड़पति भी दो वक्त रोटी का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। लाखों की संख्या में लोग देश छोड़कर जा रहे हैं।

महंगाई आसमान पर

वेनेज़ुएला की राष्ट्रीय असेंबली के अनुसार, जुलाई महीने में सालाना महंगाई दर बढ़कर 83,000% तक पहुंच गई है। इसका नतीजा यह हुआ है कि लोगों के लिए खाने-पीने का सामान और मूलभूत ज़रूरत की चीज़ें ख़रीदना भी मुश्किल हो गया है। यहां एक कप कॉफी की क़ीमत 25 लाख बोलिवर हो चुकी है। एक किलो सब्जी खरीदने के लिए लाखों बोलिवर (स्‍थानीय करेंसी) देने पड़ रहे हैं। लोग किसी सामान के लिए नगद में पैसे तक नहीं दे पा रहे हैं। वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस माडुरो ने इन स्थितियों से निपटने के लिए कुछ क़दम उठाए हैं, लेकिन उनका कोई ख़ास फ़ायदा नहीं दिखा है।

कुछ सामानों की कीमत

  • एक कप कॉफी : 25 लाख
  • एक किलो मीट : 95 लाख
  • एक किलो आलू : 20 लाख
  • एक किलो गाजर : 30 लाख
  • एक किलो चावल : 25 लाख
  • एक किलो पनीर : 75 लाख
  • एक किलो टमाटर : 50 लाख
  • एक प्लेट नॉनवेज थाली : 1 करोड़

क्‍यों बिगड़े हालात ?

वेनेज़ुएला में बड़ी संख्या में तेल के भंडार हैं, लेकिन कहा जाता है कि यही ताक़त उसकी समस्याओं का कारण भी बन गई है। वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था काफ़ी हद तक तेल पर टिकी है और तेल से मिलने वाला राजस्व उसके निर्यात का 95 प्रतिशत है। परेशानी तब शुरू हुई जब 2014 में तेल की क़ीमतें गिरने के बाद से विदेश मुद्रा में कमी आने लगी। इस कारण वेनेज़ुएला के लिए विदेश से पहले जैसी मात्रा में सामान मंगाना कठिन हो गया लेकिन लोगों की मांग और ज़रूरत पहले जैसे ही बनी रही। अब मांग और आपूर्ति का ये अंतर इतना बढ़ गया है कि महंगाई अपने चरम पर पहुंच गई है। यही नहीं, यहां की सरकार ने जरूरत से ज्यादा करेंसी भी छपवा दी है, जिसके कारण इसकी वैल्यू काफी कम हो गई है।

23 लाख लोगों ने छोड़ा देश

महंगाई की मार न झेल पाने के कारण अब लोग वेनेज़ुएला छोड़कर जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014 से अबतक करीब 23 लाख लोग देश छोड़ चुके हैं। लोग यहां से पड़ोसी देश कोलंबिया जा रहे हैं। फिर कोलंबिया से आगे इक्‍वाडोर, पेरू और चिली में भी शरण ले रहे हैं। कई लोग ब्राज़ील भी जा रहे हैं। देश छोड़ने वाले कई लोगों का कहना है कि वह यहां ऑपरेशन नहीं करा सकते, उनका इलाज नहीं हो पा रहा है, इसलिए यहां से जा रहे हैं। गर्भवती महिलाएं कोलंबिया जा रही हैं ताकि उनकी सुरक्षित ​डिलीवरी हो सके। जो लोग वेनेज़ुएला नहीं छोड़ सकते, वो किसी तरह गुजारा कर रहे हैं।

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