प्रमोशन में आरक्षण : SC ने पूछा – अमीरों को आरक्षण के लाभ से क्यों नहीं कर सकते वंचित ?

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नई दिल्ली। SC/ST कर्मचारियों को सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जिस तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अमीर लोगों को क्रीमी लेयर के सिद्धांत के तहत आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाता है, उसी तरह एससी-एसटी के अमीरों को पदोन्नति में आरक्षण के लाभ से क्यों वंचित नहीं किया जा सकता? अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी।

क्‍या कहा सर्वोच्‍च अदालत ने ?

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा, ‘शुरुआती स्तर पर आरक्षण में कोई दिक्कत नहीं है। मान लीजिए, यदि कोई व्यक्ति आरक्षण का लाभ उठाकर राज्य का मुख्य सचिव बन जाता है तो क्या यह जायज़ होगा कि उसके परिवार के सदस्यों को भी पिछड़ा मानकर पदोन्नति में आरक्षण का लाभ दिया जाए ?’ सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल भी किया कि मान लिया जाए कि एक जाति 50 सालों से पिछड़ी है और उसमें एक वर्ग क्रीमीलेयर में आ चुका है, तो ऐसी स्थितियों में क्या किया जाना चाहिए ?  कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा है कि आरक्षण का पूरा सिद्धांत उन लोगों की मदद देने के लिए है, जो सामाजिक रूप से पिछड़े हैं और सक्षम नहीं हैं। ऐसे में इस पहलू पर विचार करना बेहद ज़रूरी है।

पिछली सुनवाई पर क्‍या कहा था केंद्र ने ?

बता दें कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि 2006 के नागराज जजमेंट के चलते अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए प्रमोशन में आरक्षण रुक गया है। केंद्र सरकार की तरफ़ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्रमोशन में आरक्षण देना सही है या गलत, इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता लेकिन 1000 साल से SC/ST जो भुगत रहे हैं, उसे संतुलित करने के लिए उन्‍हें आरक्षण दिया है। ये लोग आज भी उत्पीड़न के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ को फ़ैसले की समीक्षा की ज़रूरत है।

शांतिभूषण ने किया केंद्र की याचिका का विरोध

संविधान पीठ में पक्षकारों के वकील शांति भूषण ने नागराज के फैसले पर पुनर्विचार को लेकर केंद्र सरकार की याचिका का विरोध किया। शांतिभूषण ने कहा कि यह वोट बैंक की राजनीति है और इस मुद्दे को राजनीतिक बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति में कोटा अनुच्छेद 16 (4) के तहत संरक्षित नहीं है, जहां ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा आ जाएगी। शांतिभूषण ने यह भी कहा कि सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में SC/ST के लिए कोटा अनिवार्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और ये संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन करेगा।

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