यूनिटेक के डायरेक्टरों की संपत्ति बेचकर घर खरीदने वालों को लौटाएं पैसा : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली हाईकोर्ट के पूर्व न्‍यायाधीश एसएन ढींगरा की अध्‍यक्षता वाले पैनल को निर्देश दिया है कि रियल एस्टेट प्रमुख यूनिटेक लिमिटेड के निदेशकों की संपत्तियों को बेचकर घर खरीदने वालों के पैसे वापस किए जाएं। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह से कहा कि वह पाक-साफ होकर आए। शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उसकी आवासीय परियोजनाएं पहली नजर में अवैध लगती हैं और उसका रियल एस्टेट कारोबार ‘मकड़जाल’ की तरह है।

क्‍या कहा सर्वोच्‍च अदालत ने ?

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्‍ली हाईकोर्ट के पैनल को निर्देश दिया है कि वह यूनिटेक के निदेशकों की कोलकाता वाली संपत्ति को बेचकर इसकी शुरुआत करें। इस बेंच के जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ ने समिति को निर्देश दिया है कि 25 करोड़ रुपये घर खरीदार को तय हुए सौदे के तहत दिए जाएं। इसके लिए कोर्ट ने एमिकस क्यूरी वकील पवनश्री अग्रवाल और दो अन्‍य लोगों को इस प्रक्रिया के लिए नियुक्‍त किया है। कोर्ट अब इस मामले में अगली सुनवाई 11 सितंबर को करेगी।

पिछली सुनवाई पर क्‍या कहा था कोर्ट ने ?

इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु की संपत्तियों की नीलामी करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने समिति से कहा था कि वह उत्तर प्रदेश के आगरा और वाराणसी तथा तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर स्थित उन संपत्तियों की नीलामी करे जिनके ऊपर कोई देनदारी नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले शीर्ष अदालत ने एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था जिससे रीयल एस्टेट कंपनी की 600 एकड़ जमीन की नीलामी का काम तेजी से पूरा किया जा सके और उन घर के खरीदारों को पैसा लौटाया जा सके।

आम्रपाली ग्रुप से मांगा संपत्तियों का ब्‍योरा

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली को अपनी गिरवी रहित संपत्तियों का ब्योरा प्रदान करने को भी कहा है। कोर्ट ने कहा कि समूह पर इतनी अधिक देनदारियां हैं कि उसकी संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त रकम का अधिकारियों, कर और सुरक्षित ऋणदाताओं को भुगतान करने के बाद काफी कम राशि बचेगी। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा कि भारतीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड (एनबीसीसी) द्वारा लंबित परियोजनाओं के निर्माण के लिए 5000 करोड़ से अधिक रुपये हासिल करने का एकमात्र उपाय है कि आम्रपाली समूह के निदेशकों की निजी संपत्तियां बेच दी जाएं। पीठ ने सभी निदेशकों से 7 दिन में विस्तृत हलफनामा मांगा, जिन्होंने कुछ महीने के लिए भी समूह में सेवा दी। पीठ ने उनकी निजी संपत्तियों और बैंक खातों का भी ब्योरा मांगा।  पीठ ने कहा, ‘पहली नजर में ऐसा लगता है कि समूह की नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सभी आवासीय संपत्तियां जहां लोगों को कब्जा दिया गया है, वो अवैध हैं क्योंकि किसी के पास कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं है।’

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