अब देश में खुलेंगे पोर्टेबल पेट्रोल पंप, गांव हो या पहाड़ सिर्फ 2 घंटे में लगा सकेंगे

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नई दिल्‍ली। हो सकता है कि आने वाले समय में पेट्रोल पंप गुजरे जमाने की बात हो जाएं। ऐसा संभव होगा पोर्टेबल पेट्रोल पंप की वजह से। पोर्टेबल पेट्रोल पंप की तकनीक को पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपनी मंजूरी दे दी है। भारतीय कंपनी एलिंज ने चेक गणराज्य की कंपनी पेट्रोकार्ड के साथ मिलकर भारतीय बाजार में मोबाइल पेट्रोल पंप उतार रही है।

क्‍या है इस पेट्रोल पंप की खासियत ?

कंपनी ने दावा किया है कि इस पेट्रोल पंप को कहीं भी दो घंटे के अंदर स्थापित किया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर उसे दो घंटे के भीतर ही वहां से हटा भी सकेंगे। इनमें पेट्रोल टैंक जमीन के अंदर न होकर, जमीन से ऊपर रहेंगे। यूरोप के बाजारों में पहले से ही सफलतापूर्वक काम कर रही इस तकनीक के भारत में आ जाने के बाद उन क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल मिलना सुगम हो जाएगा, जहां जगह की कमी है या आवागमन में दिक्‍कत की वजह से पेट्रोल पंप नहीं लगाए जा सकते। यही नहीं, इस तकनीक से बाढ़-भूकंप के समय भी किसी भी जगह इस मोबाइल पेट्रोल पंप को लगाकर लोगों को तत्काल पेट्रोल या डीजल मुहैया कराया जा सकेगा। कंपनी को उम्मीद है कि भारतीय सेना और रेलवे भी इसका अधिकतम उपयोग कर सकते हैं।

कितनी जगह चाहिए इसके लिए ?

एलिंज के शीर्ष अधिकारी इंदरजीत प्रुथी ने दिल्ली में पत्रकारों को इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि इस तकनीक के सबसे छोटे पेट्रोल पंप लगाने के लिए न्यूनतम 20X20 मीटर जगह की आवश्यकता होती है जो वर्तमान पेट्रोल पंपों की तुलना में बहुत कम है। इस सबसे छोटे मॉडल के पंप में एक बार में 10 हजार लीटर पेट्रोल या डीजल रखा जा सकेगा। बड़े मॉडल के पोर्टेबल पेट्रोल पंपों की स्टोरेज क्षमता 35 हजार लीटर तक होती है। इनके लिए थोड़ी अधिक जगह की जरूरत पड़ेगी।

कितनी आएगी लागत ?

इंदरजीत प्रुथी ने बताया कि पोर्टेबल या मोबाइल पेट्रोल पंप के तीन मॉडल होंगे। पहले मॉडल पर कुल 90 लाख रुपये की लागत आएगी। दूसरे मॉडल के लिए यह लागत 1 करोड़ रुपये तो तीसरे के लिए 1.2 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें पोर्टेबल पेट्रोल पंपों को लाने से लेकर इंस्टाल करने तक की कीमत शामिल है। कंपनी का कहना है कि इन पेट्रोल पंपों को लगाते समय बैंक 80 फीसदी तक का लोन देने को तैयार हैं। राज्य के स्थानीय निकाय की अनुमति के बाद किसी भी स्‍थान पर पोर्टेबल पंप लगाए जा सकते हैं। कंपनी इसके लिए डीलर नियुक्त करेगी।

कौन खोल सकेगा ये पंप ?

इन पेट्रोल पंपों को खोलने के लिए राज्य सरकार और तेल कंपनियों की इजाजत लेनी पड़ेगी। जिनके पास सरकार और तेल कंपनियों का अनुमति पत्र होगा, कंपनी उनको ये मशीनें बेचेगी। सरकार किस क्षेत्र में कितने पेट्रोल पंप लगाने की अनुमति देती है, यह उसकी इच्छा पर निर्भर करेगा। हालांकि, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और रिलायंस व एस्‍सार जैसी तेल विपणन की कंपनियों ने एलिंज से इस मॉडल को लगाने के लिए सहमति जताई है।

चार तरह के ईंधन मिलेंगे इन पंपों पर

कंपनी के रीजनल डेवलेपमेंट मैनेजर पी. भट ने बताया कि इन मोबाइल पेट्रोल पंपों पर एक साथ चार प्रकार के ईंधन बेचे जा सकेंगे। इनमें एक साथ पेट्रोल, डीजल, केरोसीन और एलपीजी को रखा जा सकता है। यही नहीं, कंपनी इन मशीनों में सीएनजी को रखने की भी तैयारी कर रही है। इस पेट्रोल पंप को गांव और पहाड़ी इलाका, कहीं भी लगाया जा सकता है। भट ने बताया कि इस तकनीक को चेक कंपनी पेट्रोकार्ड के साथ मिलकर विकसित किया गया है। पिछले 8 सालों से इस तकनीक पर काम किया जा रहा था। इस काम में पेट्रोलियम कंपनियों के साथ भी विचार-विमर्श किया गया।

यूपी में 2000 स्‍थानों पर लगेंगे ये पंप

कंपनी ने शुरुआत में भारत में चार राज्‍यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, झारखंड और असम में प्लांट लगाने की तैयारी की है। इनमें प्रति प्लांट 400 करोड़ रुपए की लागत आएगी। हालांकि बाद में देश में और जगहों पर भी प्लांट लगाए जा सकते हैं। ये प्लांट पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के माध्यम के तहत लगाए जाएंगे। कंपनी का कहना है कि इससे रोजगार में भी बढ़ोतरी होगी। हर पेट्रोल पंप पर एक या दो लोगों को जरूरत होगी।  भट ने बताया कि सबसे पहले उत्तर प्रदेश में 2000 जगहों पर पोर्टेबल पंप लगाने की योजना है। कंपनी इस काम के लिए डीलरशिप देगी। डीलर को राज्य सरकार की तरफ से लाइसेंस दिए जाएंगे।

कैशलेस होंगे ये पेट्रोल पंप

कंपनी के अधिकारी प्रुथी का कहना है कि इन पेट्रोल पंपों को कैशलेस रखा गया है। कोई भी ग्राहक किसी भी कंपनी का क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, डिजिटल पेमेंट ऑप्शन जैसे पेटीएम या अन्य तरीके से भुगतान कर सकता है। हालांकि जो इस तकनीकी के इस्तेमाल में समर्थ नहीं हैं, वे पेट्रोल पंप पर नियुक्त कर्मचारी को नकद देकर उनके माध्यम से कैशलेस पेमेंट करा सकेंगे।

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