क्या है ये रॉकेट से निकलती सफेद लकीर, अगर नहीं मालूम तो अब जान लीजिए

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नई दिल्ली। बचपन में हम कई बार रॉकेट को देखकर खुश होते थे। रॉकेट को देखकर हम यही सोचते थे कि उसके पीछे सफेद-सफेद लकीर क्या है। अगर इसका जवाब आजतक नहीं मिला है तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ये रॉकेट से बनती ये सफेद लकीर क्या होती है।

क्या कहते हैं सफेद लकीर को ?

आप जानते हैं कि आसमान में बनने वाली इस सफेद लकीर को क्या कहते हैं? इसे Contrails कहते हैं। ये भी बादल ही होते हैं पर ये सफेद लकीर के बादल आम बादलों की तरह नहीं होते हैं। ये रॉकेट की वजह से बनते हैं और काफी ऊंचाई पर ही बनते हैं।

कैसे बनती है सफेद लकीर ?

रॉकेट के एग्जॉस्ट से Aerosols निकलते हैं। जब पानी की भाप इन Aerosols के साथ जम जाती है तो Contrails बनते हैं। रॉकेट के एग्जॉस्ट से भाप और कई ठोस पदार्थ निकलते हैं। इनमें कार्बन डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड प्रमुख हैं। इनके अलावा इसमें से सल्फेट और मीथेन जैसे हाइड्रोकार्बन भी निकलते हैं। इनमें से कुछ Contrails बनाने में मददगार होते हैं, बाकी सिर्फ प्रदूषण में सहयोग देते हैं।

तीन प्रकार के होते हैं Contrails

1.Short Lived Contrails : ये Contrails कुछ ही समय में गायब हो जाते हैं। जैसे ही रॉकेट गुजरता है, ये भी लुप्त हो जाते हैं।

2.Persistent Contrails (Non-spreading) : ये Contrails लंबी लाइन होती हैं, जो आसमान में रॉकेट जाने के बाद तक दिखती हैं। इसके बनने का करण हवा में नमी होती है।

3.Persistent Spreading Contrails : ये Contrails हवा में फैलने लगती हैं और ज्यादा जगह घेरती हैं। ये भी नमी के करण आसमान में काफी देर तक दिखती हैं।

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