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भीषण गर्मी की ये है वजह, आने वाले समय में और झुलसा सकता है तापमान

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ओस्लो। दुनिया तेजी से गर्म हो रही है। हालत ये है कि ब्रिटेन जैसे देश में भी तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है और लोग परेशान हो जाते हैं। उत्तरी अमेरिका में भी ऐसा ही हाल देखने को मिलता है और भारत समेत एशिया के देशों में भी बीते कुछ दशक से हर साल गर्मी बढ़ती जा रही है। एक रिसर्च बताता है कि गर्मी बढ़ने की वजह क्या है। रिसर्च ये भी बताता है कि आने वाले वक्त में गर्मी और भीषण रूप लेगी।

इस वजह से बढ़ रही गर्मी

नेचर कम्युनिकेशन्स में छपी रिसर्च में कहा गया है कि उत्तरी ध्रुव पर लगातार बढ़ती गर्मी की वजह से ही दुनिया के तमाम इलाके गर्म हो रहे हैं। इनमें यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया के इलाके हैं। रिसर्च के मुताबिक उत्तरी ध्रुव के गर्म होने से बाकी जगह भी गर्मी लगातार बनी हुई है। रिसर्च के नतीजे कहते हैं कि उत्तरी ध्रुव भी गर्म हो रहा है, इससे धरती पर गर्म और ठंडी हवा के प्रवाह में गड़बड़ी हो रही है और गर्म हवा एक जगह पर लगातार बनी रहती है। जिसकी वजह से संबंधित इलाकों में लोग शिद्दत की गर्मी झेलते हैं।

आने वाले दिनों में गर्मी का मौसम होगा लंबा

शोध करने वालों में शामिल पोट्सडैम इंस्टीट्यूट ऑफ क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के डिम कूमू का कहना है कि वैसे तो कुछ वक्त के लिए गर्म हवा अच्छी लगती है, लेकिन लंबे वक्त तक गर्म हवा और झुलसाने वाली गर्मी ठीक नहीं लगती। इसका समाज के साथ ही फसलों पर भी खराब असर पड़ता है। साल 2018 में भी तमाम फसलों के नष्ट होने में गर्मी का बड़ा हाथ रहा है। साथ ही गर्मी से स्वास्थ्य पर भी खराब असर पड़ रहा है।

हवा का प्रवाह इस तरह रुक रहा

बता दें कि धरती पर विषुवत रेखा सबसे ज्यादा गर्म जगह है। यहां की हवा भी इस वजह से गर्म होती है। ये गर्म हवा उत्तर की ओर बहती है और आर्कटिक की ठंडी हवा से टकराकर अपनी ज्यादातर गर्मी खो देती है, लेकिन जब आर्कटिक यानी उत्तरी ध्रुव की हवा ही गर्माने लगे, तो वो विषुवत रेखा से आने वाली गर्म हवा को उतना ठंडा नहीं कर पाती। इस वजह से समुद्रों में भी तूफान बन रहे हैं। 2017 में इसी वजह से बना हार्वे नाम के तूफान ने अमेरिका के टेक्सास प्रांत में काफी कुछ तहस-नहस किया था।

गर्मी बढ़ने से ये भी हो रहा

गर्मी बढ़ने की वजह से लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर तो पड़ ही रहा है और फसलें भी नष्ट हो रही हैं। साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी इससे बढ़ी हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के क्रिस रैप्ली का कहना है कि ये रिसर्च दिखाती है कि धरती की उर्जा को बैलेंस न कर पाने की वजह से आने वाले दिनों में हालात और विषम हो सकते हैं।

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