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भड़काऊ भाषण प्रकरण : सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, क्यों न चले योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा ?

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  • सर्वोच्‍च अदालत ने उत्‍तर प्रदेश सरकार को जारी किया नोटिस, चार हफ्ते में मांगा जवाब

नई दिल्ली। 11 साल पुराने भड़काऊ भाषण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत पा चुके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस कथित भड़काऊ भाषण के मामले में यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ केस क्यों न चलाया जाए? कोर्ट ने सरकार से इस मामले में 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।

क्‍या है मामला ?

दरअसल, 27 जनवरी 2007 को योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था। इस दंगे में दो लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस दंगे के लिए तत्कालीन सांसद व मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ, तत्कालीन विधायक आरएमडी अग्रवाल और गोरखपुर की तत्कालीन मेयर अंजू चौधरी पर भड़काऊ भाषण देने और दंगा भड़काने का आरोप लगा था। आरोप था कि इनके भड़काऊ भाषण के बाद ही दंगा भड़का। इस मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद योगी आदित्यनाथ समेत बीजेपी के कई नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।

हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी अर्जी

वर्ष 2008 में मोहम्मद असद हयात और परवेज़ ने सीबीआई जांच को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में योगी के कथित भड़काऊ भाषण को दंगे की वजह बताया गया था। याचिका में योगी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 153A, 395 और 295 के तहत जांच की मांग की गई, जिसके बाद केस की जांच सीबीसीआईडी ने की। हालांकि उस दौरान यूपी की अखिलेश सरकार से अनुमति नहीं मिलने के कारण सीबीसीआईडी कोई चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई। पिछले साल (2017 में) यूपी सरकार ने योगी आदित्यनाथ को अभियुक्त बनाने से ये कहकर मना कर दिया था कि उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं हैं। इसके बाद 1 फरवरी, 2018  को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी समेत 8 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया था। इसी मामले को लेकर याचिकाकर्ता परवेज ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

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