खाने की किल्लत, लेकिन मोटापे में भारत नंबर तीन पर

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  • दुनिया की एक तिहाई आबादी है मोटापे की शिकार, पूरी दुनिया में मोटे लोगों की संख्‍या 2.2 अरब  

लंदन। आज से लगभग साढ़े तीन दशक पहले यानी 1980 में 85.7 करोड़ लोग दुनिया में मोटापे का शिकार थे जबकि 2015 में इनकी संख्या बढ़कर 2.2 अरब हो गई। यह दुनिया की आबादी का 30 प्रतिशत था, यानी जिस रफ्तार से दुनिया की जनसंख्या बढ़ी, उसकी तुलना में यह वृद्धि ज्यादा है। इस तरह दुनिया की करीब एक तिहाई आबादी मोटापे का शिकार है। 180 देशों के आंकड़े के आधार पर एक अध्‍ययन में यह खुलासा हुआ है। यह अध्‍ययन ये ब्रिटेन के लांसेट जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

किसने किया अध्‍ययन ?

यह अध्‍ययन वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवेल्यूएशन इंस्टीट्यूट (IHME) ने किया। इसके तहत 1980 से 2015 के बीच 180 देशों में बच्चों और वयस्कों में वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा वजन और मोटापे की समस्या का अध्‍ययन किया गया। स्टडी के मुताबिक मोटापे की समस्या औद्योगिक और विकासशील देशों, दोनों में समान रूप से बढ़ी है। मोटापे के कारण लोग स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से परेशान हैं।

तीसरे नंबर पर है भारत

अध्ययन में कहा गया है कि मोटापे से ग्रस्त आबादी दुनिया के 10 देशों में रहती है। इनमें पहले नंबर पर अमेरिका, दूसरे पर चीन, तीसरे पर भारत फिर जर्मनी हैं। मोटापे से पीड़ित 67.1 करोड़ लोगों में जिनका BMI 30 या उससे ज्यादा है, ऐसे अधिकतर लोग अमेरिका में रहते हैं। इनकी संख्‍या कुल मोटे लोगों की 33 फीसदी है। चीन और भारत में दुनिया के 15 फीसदी मोटे लोग रहते हैं। इसके बाद रूस, ब्राजील, मेक्सिको, मिस्र, जर्मनी, पाकिस्तान और इंडोनेशिया का नंबर आता है। पिछले तीन दशकों में जिन देशों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ी है, उनमें मिस्र, सऊदी अरब और ओमान शामिल हैं। मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में करीब 60 फीसदी पुरुष और 65 फीसदी महिलाएं मोटी हैं।

एक साल में 24 लाख लोगों की मौत

रिसर्च के अनुसार वर्ष 2015 में पूरी दुनिया में 2.2 अरब लोग मोटापे का शिकार थे। इनमें 10 करोड़ बच्चे और 60 करोड़ से अधिक व्यस्क थे। रिसर्च में कहा गया है कि वर्ष 2015 में हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर और मोटापे से जुड़ी अन्य बीमारियों के कारण 40 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से 60 फीसदी से ज्‍यादा मौतें मोटापे के कारण हुई बीमारियों से हुई। यह संख्‍या वर्ष 1990 के दशक में मरने वालों से 28 प्रतिशत अधिक है।

किसे कहते हैं मोटापा ?

किसी व्यक्ति को मोटा तब कहा जाता है, जब लंबाई की तुलना में उसका वजन ज्यादा होता है। इस स्केल को बॉडी मास इंडेक्स (BMI) कहते हैं। इसके तहत प्रति किलोग्राम वजन को प्रति सेंटीमीटर में बांटा जाता है। यदि किसी व्यक्ति का BMI 18.5 से 24.9  के बीच हो तो उसका वजन सामान्‍य माना जाता है।  BMI 25  से 29.9  के बीच हो तो इसका मतलब है कि आपका वजन ज्‍यादा है और अगर BMI 30 से ज्‍यादा है तो इसका मतलब है कि आप मोटापे का शिकार हैं।

क्‍या है इसका कारण ?

आईएचएमई के निदेशक क्रिस्टोफर मरे के मुताबिक, ‘मोटापा ऐसा मुद्दा है जो सभी उम्र  और  आय वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है। आय और मोटापे में मजबूत संबंध है। जितनी ज्यादा संपन्नता आती है,  कमर का आकार उतना ही बढ़ने लगता है। उधर, डॉक्‍टरों का कहना है कि खराब पोषण,  शारीरिक व्‍यायाम की कमी और सस्ते में मिलने वाली वसा से भरपूर खाना इस समस्या का मुख्य कारण है। इसके अलावा तनाव, नींद की कमी और आनुवांशिक कारणों से भी मोटापा हो सकता है। कुछ दवाएं भी मोटापा बढ़ाने का कारण होती हैं।

बच्‍चों और युवाओं में बढ़ी समस्‍या

शोधकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता ये है कि बच्चे और युवाओं में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अल्जीरिया, टर्की और जॉर्डन समेत कई देशों में वयस्कों की तुलना में बच्चों में मोटापे की दर तेजी से बढ़ रही है। स्टडी की प्रमुख लेखक मैरी एनजी कहती हैं, ‘हम जानते हैं कि बचपन से होने वाले मोटापे के स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम होते हैं। इससे दिल की बीमारी, मधुमेह और कई तरह के कैंसर के खतरे होते हैं। हमें इस बारे में गंभीरता से विचार करना होगा कि इसे कैसे रोका जाए।

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