देश के इस राज्य में शौचालय तो हैं लेकिन कोई जाता नहीं, कैसे पूरा होगा लक्ष्य ?

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नई दिल्ली। देश को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए भारत सरकार 2 अक्टूबर, 2014 से स्वच्छ भारत अभियान चला रही है। पिछले तीन वर्षों में इसको लेकर काफी काम किया जा रहा है, लेकिन अब भी भारत खुले में शौच के मामले में विश्व में नंबर एक पर है। राजस्थान में जिन पंचायतों को खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है, वहां पर भी खुले में शौच के मामले सामने आए हैं।

ये सवाल भी आए सामने

रिसर्च ग्रुप फॉर पॉलिसी रिसर्च के मुताबिक, 9 ग्राम पंचायतों में से केवल एक में 100% लोगों के पास शौचालय है लेकिन सर्वे के दिन ही 38% लोगों ने खुले में शौच किया था। अकाउंटेबिलिटी इनिशिएटिव के डायरेक्टर अवनि कपूर का कहना है कि इस सर्वे से दो सवाल सामने आते हैं। पहला यह कि पंचायतों को खुले में शौच मुक्त घोषित करने में इतनी जल्दबादी क्यों की जाती है। दूसरा, किसी भी वैरिफिकेशन प्रोसेस की सच्चाई क्या है।

2018 तक राज्‍य को पूरा करना है लक्ष्य

जुलाई 2014 में, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राज्य को साल 2018 तक खुले में शौच मुक्त घोषित करने का लक्ष्य तय किया था। जिला प्रशासन ने स्वच्छ भारत मिशन पर काम करना जुलाई 2015 से शुरू कर दिया था। पहले चरण में उदयपुर जिले के 544 ग्राम पंचायतों (जीपी) में से 105 को खुले में शौच मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया था। 2016 नवंबर में 53 ग्राम पंचायतों ने खुद को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया था। साल 2018 में उदयपुर की 544 ग्राम पंचायतों ने खुद को खुले में शौच मुक्त घोषित किया।

खुले में शौच करने वालों की संख्या बढ़ी

सर्वे में सामने आया कि 36 प्रतिशत परिवारों में जिनके पास शौचालय है, वहां हर तीसरा इंसान खुले में शौच कर रहा है, लेकिन इस बारे में कभी भी ग्राम पंचायत ने सर्वे नहीं किया है। सर्वे में सामने आया कि शौचालय का प्रयोग धीरे-धीरे घट रहा है। साल 2015 में 26 प्रतिशत लोग जिनके घर में शौचालय हैं, वो खुले में शौच कर रहे थे। जब साल 2017 में सर्वे किया गया तो खुले में शौच करने वालों की संख्या बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई।

क्‍या है इसका कारण ?

इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि खुले में शौच मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया में शौच को निपटाने (faecal sludge management) की व्यवस्था नहीं की गई है। शौचालय के लिए टैंक बनवाने में काफी पैसा खर्च होता है। सर्वे में सामने आया कि 19 प्रतिशत लोग जिनके घर में शौचालय है, वो टैंक बनवाने के लिए लोन ले रहे हैं। ज्यादातर लोन 59,000 रुपए के होते हैं।

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