पंचतत्व में विलीन हुए अटल बिहारी वाजपेयी, दत्तक पुत्री नमिता ने दी मुखाग्नि

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नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और जननेता अटल बिहारी वाजपेयी का पार्थिव शरीर शुक्रवार (17 अगस्‍त) शाम पंचतत्व में विलीन हो गया। उनका अंतिम संस्‍कार यमुना किनारे स्मृति स्थल पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। हजारों नम आंखों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। वाजपेयी की दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने उन्हें मुखाग्नि दी।

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

आज सुबह अटलजी के निवास से उनके पार्थिव शरीर को दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित बीजेपी मुख्यालय ले जाया गया। वहां उनके दर्शन का सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। वहां से दोपहर 2 बजे अटलजी की अंतिम यात्रा शुरू हुई। उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। अंतिम यात्रा में उनके पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे वाहन के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पैदल चल रहे थे। उनके साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और विजय रूपाणी, शिवराज चौहान, योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडणवीस समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी वाहन के पीछे चल रहे थे। हजारों की संख्या में लोग 7 किलोमीटर लंबे मार्ग पर वाहन के साथ स्‍मृति स्‍थल पहुंचे। इस दौरान लोग ‘अटल बिहारी अमर रहे’ के नारे लगा रहे थे।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने दी मुखाग्नि

तीनों सेनाओं की ओर से दी गई सलामी

स्मृति स्थल पर तीनों सेनाओं की ओर से वाजपेयी को अंतिम सलामी दी गई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वाजपेयी के पुराने साथी रहे लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा स्पीकर, संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत कई गणमान्य हस्तियों ने अटल को श्रद्धांजलि दी। यह उनका असाधारण व्यक्तित्व ही था कि मतभेद के बावजूद विपक्षी दलों के बड़े नेता भी इस जननेता के आखिरी दर्शन के लिए स्मृति स्थल पहुंचे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, मुलायम सिंह यादव, नीतीश कुमार, राज्यों के मुख्यमंत्री, गवर्नर समेत सभी विपक्षी दलों के नेता मौजूद रहे।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सलामी देते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और तीनों सेनाओं के प्रमुख

विदेशी नेताओं ने भी दी श्रद्धांजलि

पड़ोसी देशों की ओर से भूटान नरेश जिग्मे नामग्याल वांग्चुक, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और वाजपेयी के मित्र रहे हामिद करजई ने भी स्मृति स्थल पहुंचकर उन्हें अंतिम विदाई दी। इनके अलावा बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के विदेश मंत्री और पाकिस्तान के सूचना मंत्री भी अटलजी को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। उन्‍हें सियासत की दुनिया का ‘अजातशत्रु’ कहा जाता था क्योंकि उन्होंने हमेशा दोस्त बनाए, उनका दुश्मन कोई नहीं था। नातिन निहारिका ने जब वाजपेयी के पार्थिव शरीर पर से तिरंगा ग्रहण किया,  उस पल स्मृति स्थल पर मानों घड़ी की सुई कुछ देर के लिए थम गई, पूरा माहौल गमगीन था। बेटी, नातिन और परिवार के लोग ही नहीं स्मृति स्थल पर मौजूद हर किसी की आंखों में आंसू थे।

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