इस एक चिंता ने छीन ली है बाबा रामदेव के चेहरे से मुस्कराहट

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मुंबई। योगगुरु बाबा रामदेव के चेहरे की मुस्‍कराहट आजकल छिन गई है। वो दिन-रात बस एक ही चिंता में डूबे हैं। वजह है भी अहम। आखिर, जिस वजह से उनकी पहचान घर-घर पहुंची, वो ही मुश्किल में है।

बाबा रामदेव की चिंता की ये है वजह

हुआ ये है कि बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद की बढ़त बीते एक साल में कम हो गई है। वजह ये बताई जा रही है कि एफएमसीजी प्रोडक्ट बनाने वाली तमाम कंपनियां पतंजलि से मुकाबला करने के लिए अपने हर्बल प्रोडक्ट बाजार में ले आई हैं। पतंजलि का विकास कितना धीमा हुआ है, ये इसी से समझा जा सकता है कि कैंटर वर्ल्ड पैनल के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल से सितंबर 2017 तक पतंजलि की ग्रोथ 22 फीसदी थी, लेकिन अक्टूबर 2017  से मार्च 2018 तक इसमें 7 फीसदी ही बढ़ोतरी हुई। पिछले साल के इसी अवधि  के मुकाबले ये ग्रोथ 49 से 52 फीसदी तक कम है।

क्रेडिट सुइस ने भी गिरावट की बात कही थी

बीते दिनों क्रेडिट सुइस ने भी कहा था कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में पतंजलि के उत्पादों की बिक्री में 4 साल बाद बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई। इससे पहले के वित्तीय वर्ष तक पतंजलि 100 फीसदी सीएजीआर ग्रोथ कर रही थी।

छोटी फार्मेसी से की थी शुरुआत

बता दें कि पतंजलि के नाम से 1997  में बाबा रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने एक छोटी फार्मेसी शुरू की थी। अब कंपनी दो दर्जन से ज्यादा किस्म के प्रोडक्ट बनाती है। इनमें टूथपेस्ट, शैंपू से लेकर कॉर्नफ्लेक्स और नूडल्स भी है। ब्रोकरेज फर्म एंबिट का हवाला देते हुए एक अंग्रेजी अखबार ने लिखा है कि  पिछले एक साल में सिर्फ टूथपेस्ट और शहद ही ऐसी कैटेगरी हैं, जिनमें पतंजलि का मार्केट शेयर बढ़ा है। वहीं साबुन और एडिबल ऑइल का मार्केट शेयर पहले जैसा ही बना रहा। हेयर ऑइल, शैंपू और बटर सेगमेंट में पतंजलि के मार्केट शेयर में गिरावट आई है।

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