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डॉलर के मुकाबले रुपया सबसे निचले स्तर पर, आखिर क्या है इसकी वजह !

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  • वर्ष 2018 में 10 फीसदी तक टूटा रुपया, रिकॉर्ड निचले स्तर 70.31 तक पहुंचा

नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट लगातार जारी है। गुरुवार (16 अगस्‍त) को रुपया 29 पैसे टूटकर 70.19 के स्तर पर खुला, लेकिन खुलने के बाद ही और गिरकर 70.31 के स्तर तक पहुंच गया। यह रुपया का अबतक का सबसे निचला स्तर है। हालांकि रुपये की रिकॉर्ड गिरावट से सरकार चिंतित नहीं है। सरकार का मानना है कि विदेशी कारणों के चलते यह गिरावट आ रही है।

रघुराम राजन

पूर्व RBI गवर्नर ने बताए कारण

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने एक टीवी चैनल को इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्‍होंने रुपये की गिरावट के कारण बताए हैं। रघुराम राजन का कहना है कि वैसे तो रुपये में गिरावट चिंता का विषय नहीं है, क्‍योंकि एमर्जिंग मार्केट्स के हालात 2013 के मुकाबले काफी अच्छे हैं। दरअसल, भारत में महंगाई दर दुनिया के मुकाबले ज्यादा है, ऐसे में रुपये में थोड़ी और कमजोरी देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि हालात बेहतर होने के लिए रुपये में और कमजोरी आनी चाहिए।

टर्की संकट पर क्‍या बोले राजन ?

रघुराम राजन ने टर्की में आर्थिक संकट पर कहा कि खराब नीतियों की वजह से वहां संकट गहरा रहा है। सिर्फ टर्की ही नहीं, बल्कि कई और देशों की हालत भी नाजुक है। टर्की में करेंसी संकट अभी और बढ़ सकता है। डॉलर इंडेक्स की ऊंचाई और अमेरिका के फैसले से टर्की में ये हालात बने हैं। दरअसल, टर्की के मेटल इंपोर्ट पर ड्यूटी को अमेरिका ने दोगुना कर दिया है, जिसकी वजह से करेंसी मार्केट में हड़कंप की स्थिति है। अमेरिका के इस कदम से टर्की की करेंसी लीरा अब तक 40 फीसदी टूट चुकी है, वहीं डॉलर इंडेक्स 14 महीने की ऊंचाई पर है।

विदेशी कारणों से गिर रहा रुपया : केंद्र

भारत सरकार का कहना है कि रुपया विदेशी कारणों की वजह से गिर रहा है और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि विदेशी संकट आगे चलकर सामान्य हो जाएंगे, इससे रुपये की स्थिति में सुधार होगा। बता दें‍ कि साल 2018 में रुपया अब तक 10 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। इस साल की शुरुआत से ही रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। हालांकि बीते साल रुपये ने डॉलर की तुलना में 5.96 फीसदी की मजबूती दर्ज की थी। वहीं, अगस्‍त महीने में डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक 1.84 रुपए टूट चुका है।

क्यों गिर रहा है रुपया ?

बाजार के जानकारों की मानें तो अमेरिका और चीन में ट्रेड वॉर से तेल आयातकों के बीच डॉलर की डिमांड बढ़ी, जिससे रुपए पर दबाव बना। अगले महीने अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की भी उम्मीद हैं, जिससे डॉलर को लगातार मजबूती मिल रही है। यही नहीं, यूरोपियन करेंसी में भी स्लोडाउन आने से अन्य करेंसी के मुकाबले डॉलर में मजबूती आ रही है। यही कारण है कि रुपये में गिरावट देखी जा रही है।

कैसे तय होता है रुपये का भाव ?

करेंसी विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कीमत पूरी तरह इसकी डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करती है। इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का भी इस पर असर पड़ता है। दरअसल, हर देश के पास विदेशी मुद्रा का भंडार होता है, जिसमें वो लेन-देन करता है। विदेशी मुद्रा भंडार के घटने और बढ़ने से ही उस देश की मुद्रा की चाल तय होती है। अमेरिकी डॉलर को वैश्विक करेंसी का दर्जा हासिल है और ज़्यादातर देश आयात का बिल डॉलर में ही चुकाते हैं।

रुपये के गिरने का क्‍या होगा असर ?

करेंसी विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये के गिरने का सबसे बड़ा असर तो ये होगा कि इससे महंगाई बढ़ सकती है। इससे कच्चे तेल का आयात महंगा होगा तो ढुलाई महंगी होगी और सब्जियां और खाने-पीने की चीज़ें महंगी होंगी। इसके अलावा डॉलर में किया जाने वाला भुगतान भी अधिक हो जाएगा। साथ ही, विदेश घूमना महंगा हो जाएगा और विदेशों में बच्चों की पढ़ाई भी महंगी होगी। हालांकि इससे निर्यातकों को फायदा होगा क्‍योंकि उन्‍हें जो भुगतान होगा, वह डॉलर में मिलेगा। इसके अलावा जो आईटी और फार्मा कंपनियां अपना माल विदेशों में बेचती हैं, उन्हें भी फ़ायदा मिलेगा।

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