प्राइवेट अस्पतालों में सीजेरियन डिलीवरी की संख्या सरकारी से दोगुनी, जम्मू-कश्मीर पहले नंबर पर

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नई दिल्ली। सिजेरियन डिलीवरी इन दिनों आम होती जा रही है। कई बार डिलीवरी में कॉम्प्लिकेशन की वजह से भी सिजेरियन तकनीक का सहारा लेना पड़ता है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, देश में सी-सेक्शन यानी सिजेरियन डिलीवरी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस मामले में जम्मू-कश्मीर पहले नंबर पर है।

क्‍या है रिपोर्ट में
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, प्राइवेट अस्पतालों में 40.9% डिलीवरी सी-सेक्शन से होती है, वहीं सरकारी अस्पतालों में केवल 11.9% डिलीवरी सी-सेक्शन से होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के प्राइवेट अस्पतालों में सिजेरियन के जरिए 75.5 प्रतिशत और सरकारी अस्पतालों में 35.1 प्रतिशत बच्‍चे पैदा होते हैं। दूसरे राज्यों की बात करें तो तेलंगाना में प्राइवेट में 74.5 प्रतिशत और सराकारी में 40.3 प्रतिशत, त्रिपुरा में प्राइवेट में 73.7 और सरकारी में 18.1, वेस्ट बंगाल में प्राइवेट में 70.9 प्रतिशत और सरकारी में 18.8 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में प्राइवेट में 57 और सरकारी में 25.5 प्रतिशत, ओडिशा में प्राइवेट में 53.7 प्रतिशत और सरकारी में 11.5 प्रतिशत, असम में प्राइवेट में 53.3 और सरकारी में 12.9 प्रतिशत, गोवा में प्राइवेट में 51.3 और सरकारी में 19.9 प्रतिशत, तमिलनाडु में प्राइवेट में 51.3 और सरकारी में 26.3 प्रतिशत, सिक्किम में प्राइवेट में 49.3 और सरकारी में 18.1 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में प्राइवेट में 46.6 और सरकारी में 5.7 प्रतिशत, मणिपुर में प्राइवेट में 46.2 और सरकारी में 22.6 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश में प्राइवेट में 44.4 और सरकारी में 16.4 प्रतिशत, दिल्ली में प्राइवेट में 41.5 और सरकारी में 6.5 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में प्राइवेट में 41.5 और सरकारी में 6.5 प्रतिशत, झारखंड में प्राइवेट में 39.5 और सरकारी में 4.6 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में प्राइवेट में 31.3 और सरकारी में 4.7 प्रतिशत, बिहार में प्राइवेट में 31 और सरकारी में 2.6 प्रतिशत बच्चे सिजेरियान पैदा होते हैं।

किस वजह से होती है सिजेरियन डिलीवरी

गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर बढ़ने या दौरा पड़ने की स्थिति में डिलीवरी के लिए ऑपरेशन किया जाता है। ऐसा न करने से दिमाग की नसें फटने और लिवर-किडनी खराब होने का खतरा रहता है। सामान्य तौर पर छोटे कद वाली महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी होती है। बच्चे की धड़कन कम होने, गले में गर्भनाल लिपटी होने, बच्चे के तिरछे होने, खून का दौरा सही तरीके से होने, इन स्थितियों में सिजेरियन डिलीवरी ही की जाती है।

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