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नहीं रहे पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, 93 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

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नई दिल्ली। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार (16 अगस्‍त) को 93 साल की उम्र में दिल्ली में निधन हो गया। वो काफी समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। एम्‍स प्रशासन द्वारा शाम 5:30 बजे जारी हेल्‍थ बुलेटिन में बताया गया कि शाम 5:05 बजे उन्‍होंने अंतिम सांस ली। बता दें कि बीते 11 जून से वे दिल्ली के एम्स में भर्ती थे, जहां बीते मंगलवार से उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।

एम्‍स में लगा देखने वालों का तांता

एम्‍स में गुरुवार सुबह से ही, बल्कि ये कहें कि बुधवार की रात से ही अटल बिहारी वाजपेयी को भाजपा नेता देखने पहुंचने लगे थे। बुधवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह ने एम्‍स पहुंचकर अटलजी का हालचाल लिया। गुरुवार सुबह भाजपा अध्‍यक्ष शाह फिर एम्‍स पहुंचे। उनके साथ केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जेपी नड्डा भी थे। वहां से आने के बाद दोपहर में शाह दोबारा एम्‍स पहुंचे। इसके बाद से भाजपा और अन्‍य दलों के नेताओं का पहुंचना शुरू हो गया। नेशनल कांफ्रेंस के अध्‍यक्ष फारुख अब्‍दुल्‍ला भी अटलजी को देखने एम्‍स पहुंचे। दोपहर में करीब 2 बजे पीएम मोदी एम्‍स पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्‍होंने एम्‍स के डायरेक्‍टर डॉ. गुलेरिया से विचार-विमर्श किया। वे वाजपेयी के परिवारीजनों से भी मिले। इनके अलावा एम्‍स पहुंचने वालों में उप राष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू, लोकसभा स्‍पीकर सुमित्रा महाजन, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी, विजय गोयल, अमर सिंह, राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे, बिहार के सीएम नी‍तीश कुमार और दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल शामिल हैं।

आगरा के बटेश्वर में जन्म

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म आगरा जिले के प्राचीन स्थल बटेश्वर में 25 दिसंबर, 1924 को हुआ था। उनके पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी और मां का नाम कृष्णा वाजपेयी था। राजनीति में आने से पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन अखबारों में बतौर संपादक काम किया। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के तौर पर काम करने का संकल्प लिया था। हालांकि, एक बार मजाक में वो बोले थे कि मैं कुंवारा हूं, ब्रह्मचारी नहीं हूं।

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अहम जिम्मेदारियां निभाईं

इमरजेंसी के बाद बनी जनता पार्टी सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री रहे। वो भारत के पहले नेता थे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया था। वो 1968 से 1973 तक भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे।

राजनीतिक सफर

1955 में अटल बिहारी वाजपेयी ने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद 1957 में यूपी के बलरामपुर से जनसंघ के टिकट पर जीते। 1980 में जनता पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी बनाई। 6 अप्रैल, 1980 को वो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए। अटल बिहारी दो बार राज्यसभा के भी सदस्य रहे।

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तीन बार रहे पीएम

अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार प्रधानमंत्री रहे। पहले 13 दिन की सरकार चलाई। फिर 1997 में चुनाव के बाद 13 महीने तक वो गठबंधन सरकार चलाते रहे। 19 अप्रैल, 1998 को अटल बिहारी ने गठबंधन के साथ फिर पीएम का पद संभाला और 2004  के मई महीने तक पीएम रहे। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन की 81 मंत्रियों वाली केंद्र सरकार सफलतापूर्वक चलाकर दिखाई।

बतौर पीएम ये हैं वाजपेयी की उपलब्धियां

  • 11 और 13 मई, 19987 को पोखरण में 5 परमाणु परीक्षण कराए और भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया।
  • 19 फरवरी, 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर की बस सेवा शुरू की और खुद पाकिस्तान जाकर तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ से मिले।
  • 1999 में ही पाकिस्तान ने वाजपेयी की पीठ पर वार करते हुए करगिल में घुसपैठिए भेज दिए। अटल बिहारी ने ठोस कार्रवाई कराते हुए भारतीय इलाके को मुक्त कराया।
  • भारत के चारों महानगरों दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई को जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज नाम से सड़क बनाने की परियोजना शुरू कराई।
  • कावेरी जल विवाद को सुलझाने के लिए बड़ी पहल की।

कवि के तौर पर अटल

‘मेरी इक्यावन कविताएं’ अटल बिहारी का मशहूर काव्यसंग्रह है।

‘मृत्यु या हत्या’, ‘लोकसभा में वक्तव्यों का संग्रह’ ‘अमर बलिदान’, ‘कैदी कविराय की कुंडलियां’, ‘संसद में तीन दशक’, ‘अमर आग है’, ‘सेक्युलर वाद’, ‘राजनीति की रपटीली राहें’ और ‘बिंदु-बिंदु विचार’ उनकी अन्य कृतियां हैं।

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इन सम्मानों से नवाजे गए अटल बिहारी

1992 में अटल बिहारी वाजपेयी को पद्म विभूषण दिया गया। 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय ने डी. लिट, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में श्रेष्ठ सांसद सम्मान, 1994 में ही भारत रत्‍न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार, 2014 में भारत रत्‍न, 2015 में मध्य प्रदेश के भोज मुक्त विश्वविद्यालय से डी. लिट, 2015 में ही बांग्लादेश सरकार के फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वॉर अवॉर्ड से अटल बिहारी वाजपेयी सम्मानित किए गए थे।

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