CJI दीपक मिश्रा की तल्ख टिप्पणी – ‘सिस्टम की आलोचना करना आसान, बदलना मुश्किल’

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नई दिल्‍ली। बीते कुछ समय से आलोचनाओं का सामना कर रहे देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने आखिरकार स्‍वतंत्रता दिवस पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्‍होंने कहा, ‘ज्यूडिशियरी या सिस्टम की आलोचना करना और उस पर हमला करना बहुत आसान है, लेकिन सिस्टम को सही दिशा में बदलना और उसे बरकरार रखना बहुत मुश्किल है।’ हालांकि, चीफ जस्टिस ने अपने संबोधन में किसी का भी नाम नहीं लिया।

निजी महत्‍वाकांक्षाओं से ऊपर उठने की सलाह

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा 72वें स्वाधीनता दिवस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में तिरंगा फहराने के बाद वहां मौजूद जजों, वकीलों और कोर्ट स्टाफ को संबोधित कर रहे थे। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने सीनियर जजों को निजी महत्‍वाकांक्षाओं से ऊपर उठने की सलाह दी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेन्स करने और सीजीआई के खिलाफ मोर्चा खोलने के करीब 8 महीने बाद चीफ जस्टिस ने सार्वजनिक तौर पर यह टिप्पणी की है।

सीजेआई ने कहा, ‘तर्कसंगतता, परिपक्वता, जिम्मेदारी और स्थिरता से ही ठोस और मजबूत सुधार लाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि प्रोडक्टिव बना जाय न कि काउंटर प्रोडक्टिव।’ माना जा रहा है कि चीफ जस्टिस की यह टिप्पणी उन वकीलों के लिए है जो ज्यूडिशियरी के अंदर और बाहर टॉक शो के जरिए अक्सर जजों की आलोचना करते रहते हैं। सीजीआई से पहले अपने संबोधन में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी कहा कि वो उन खबरों और टिप्पणियों से आहत महसूस करते हैं जो कोर्टरूम में इस्तेमाल होती हैं। उन्होंने दोनों पक्षों (जजों और वकीलों) से ऐसे बेतुके तर्कों और बहसों से बचने का अनुरोध किया।

सीजेआई बनने के बाद से ही रहे विवादों में

बता दें कि मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद से ही जस्टिस दीपक मिश्रा विवादों में रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के कुछ सीनियर जजों ने इस साल की शुरुआत में चीफ जस्टिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे और सार्वजनिक तौर पर सीजेआई पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। जज लोया की मौत की जांच के मामले में भी सीजेआई पर शिथिलता बरतने के आरोप लगे थे। जस्टिस जे. चेलमेश्वर के घर पर हुई मीडिया कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चारों जजों ने कहा था, ‘सर्वोच्च न्यायालय का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।’

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