दाम बढ़ने में कच्चा तेल सबसे आगे, स्टील सबसे पीछे

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नई दिल्‍ली। वर्ष 2017 में पूरी दुनिया में कई चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई तो कई वस्‍तुओं के दाम में कमी भी आई है। जिन चीजों की कीमतों में सबसे ज्‍यादा बढ़ोतरी हुई, उनमें सबसे प्रमुख है कच्‍चा तेल। एक बार फिर कच्चे तेल की वैश्विक कीमत सुर्खियों में है। पिछले छह महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में 55 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि 2017 में यह वृद्धि करीब 40 फीसदी थी। इसके अलावा गेहूं और कपास की कीमतों में भी उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

कच्‍चा तेल

कच्चे तेल के भाव विश्व बाजार में 20 जून, 2017 को 45 डॉलर प्रति बैरल थे, जो नवम्‍बर 2017 में बढ़कर करीब 63  डॉलर प्रति बैरल हो गए। पिछले 11 महीनों से इसकी कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। 26 मार्च, 2018 को कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

गेहूं

विश्व में छोटे-बड़े मिलाकर 77 देश गेहूं का उत्पादन करते हैं। सर्वाधिक उत्पादन करने वाले देशों में यूरोपीय यूनियन, चीन, भारत, रूस, कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, पाकिस्तान, टर्की आदि शामिल हैं। वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतों में 28 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली। केंद्र सरकार ने वर्ष 2017 में गेहूं का समर्थन मूल्य 1725 रुपये प्रति क्विंटल तय किया, लेकिन मंडियों में इस दाम में कोई भी गेहूं खरीदने को तैयार नहीं था। रबी सीजन 2017 में गेहूं उत्पादन का सरकारी अनुमान 926 लाख टन बताया गया था, जबकि व्यापारिक अनुमान 850 से 870 लाख टन था। यही वजह रही कि विदेशों से करीब 50 लाख टन से अधिक गेहूं आयात किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि आयात लागत 18 रुपए किलो पड़ी और कई जगह खुले बाजार में गेहूं की कीमत 20-21 रुपए हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत में गेहूं के भाव में और वृद्धि संभव है।

प्राकृतिक गैस

प्राकृतिक गैस की कीमतों पर नजर डालें तो वैश्विक स्‍तर पर इसमें कोई बढ़ोतरी तो देखने को नहीं मिली, लेकिन कीमतों में कोई खास कमी भी नहीं आई। यह कमी महज 1 फीसदी की रही। हालांकि अगर भारत की बात करें तो सितम्‍बर 2017 में प्राकृतिक गैस के दामों में 16.5 फीसदी की बढ़ोतरी कर इसे 2.48 डॉलर से 2.89 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) कर दिया।

गोल्‍ड और सिल्‍वर

वैश्विक स्‍तर पर वर्ष 2017 में सोने के दाम में तो करीब 5 फीसदी की कमी देखने को मिली, लेकिन भारत में वर्ष 2017 के आखिर में सोने की कीमत लगभग 30 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम थी। दरअसल, देश में सोने की कीमतों में बदलाव, मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है। मुद्रा में उतार-चढाव, सेंट्रल बैंकों से खरीदारी, स्‍थानीय कर भी इसका बहुत बड़ा कारण होते हैं। भारत में सोने की कीमतें बुलियन एसोसिएशन द्वारा काफी हद तक निर्धारित की जाती हैं।

वहीं अगर चांदी की बात करें तो वैश्विक स्‍तर पर इसकी कीमतों में 9 फीसदी की कमी आई। सितम्‍बर 2017 में भारत में चांदी की कीमतें 40 हजार 500 रुपये प्रति किलोग्राम थीं, जो दिसम्‍बर 2017 में कम होकर 38,100 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए।

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