सूर्य की सतह के गूढ़ रहस्यों का पता लगाने नासा का अंतरिक्ष यान रवाना

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  • नासा ने मिशन ‘सूर्य स्पर्श’ के लिए भेजा पहला अंतरिक्ष यान पार्कर सोलर प्रोब, 100 अरब रुपये खर्च

वाशिंगटन। सूर्य के प्रचंड तापमान वाले वातावरण को टटोलने के उद्देश्य से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सूरज पर अपना पहला मिशन ‘पार्कर सोलर प्रोब’ रवाना कर दिया है। एक छोटी कार के आकार का यह अंतरक्षि यान सूरज की सतह के सबसे करीब 40 लाख मील की दूरी से गुजरेगा। इतिहास में सूर्य के इतने करीब से कोई भी अंतरिक्ष यान नहीं गुजरा है।

सूरज के 7 चक्कर लगाएगा यान

बता दें कि पहले पार्कर सोलर प्रोब को शनिवार को ही लॉन्च करना था, लेकिन तकनीकी खामी की वजह से लॉन्चिंग को टाल दिया था। रविवार (12 अगस्‍त) को केप केनेवरल स्थित प्रक्षेपण स्थल से स्थानीय समयानुसार सुबह तीन बजकर 33 मिनट पर डेल्टा-4 रॉकेट के जरिए इस यान को अंतरिक्ष रवाना किया गया। यह यान अगले 7 सालों में सूरज के 7 चक्कर लगाएगा। बता दें कि धरती और सूरज के बीच औसत दूरी 9 करोड़ 30 लाख मील है।

क्‍या है इस मिशन का उद्देश्‍य ?

इस मिशन का मुख्य उद्देश्‍य सूर्य की सतह के आसपास के असामान्य वातावरण के गूढ़ रहस्यों का पता लगाना है। यह मिशन सूरज के वायुमंडल का, जिसे ‘कोरोना’ कहते हैं, विस्तृत अध्ययन करेगा। मिशन का लक्ष्‍य यह जानना भी है कि किस तरह ऊर्जा और गर्मी सूरज के चारों ओर घेरा बनाकर रखती है। बता दें कि कोरोना का तापमान सूर्य की सतह के तापमान से करीब 300 गुना ज्यादा है। मिशीगन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और परियोजना वैज्ञानिकों में शामिल जस्टिन कास्पर ने कहा, ‘पारकर सोलर प्रोब हमें इस बारे में पूर्वानुमान लगाने में बेहतर मदद करेगा कि सौर हवाओं में विचलन कब पृथ्वी को प्रभावित कर सकता है।’

ऊष्‍मा रोधी शील्‍ड से सुरक्षित है यह यान

एक छोटी कार के आकार का यह यान 9 फीट 10 इंच लंबा है और इसका वजन 612 किलोग्राम है। इस यान को केवल साढ़े चार इंच (11.43 सेंटीमीटर) मोटी ऊष्मा रोधी कार्बन शील्ड से सुरक्षित किया गया है, जो इसे सूर्य के तापमान से बचाएगी। बता दें कि यह यान जहां तक जाएगा, वहां धरती से 500 गुना ज्यादा रेडिएशन मौजूद होगा। इस प्रोजेक्ट पर नासा ने 103 अरब रुपये खर्च किए हैं।

अमेरिकी खगोलशास्त्री के नाम पर है यह मिशन

इस मिशन का नाम अमेरिकी खगोलशास्त्री यूजीन नेवमैन पार्कर के नाम पर रखा गया है। पार्कर ने ही 1958 में पहली बार अनुमान लगाया था कि सौर हवाएं होती हैं। यह मिशन जब सूरज के सबसे करीब से गुजरेगा तो वहां का तापमान 2500 डिग्री सेल्सियस तक होगा। नासा के मुताबिक, अगर सबकुछ ठीक रहा तो यान के अंदर का तापमान 85 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। यह यान सूरज के वायुमंडल कोरोना से 24 बार गुजरेगा। बता दें कि इससे पहले ‘हेलियोस 2’ यान सूरज के सबसे नजदीक से गुजरा था। वर्ष 1976 में यह यान सूरज के करीब 4 करोड़ 30 किलोमीटर पास तक गया था।

11 लाख लोगों के नाम भी पहुंचेंगे सूर्य तक

इस यान के साथ करीब 11 लाख लोगों के नाम भी सूरज तक पहुंचेंगे। बता दें कि इसी साल मार्च में नासा ने अपने ऐतिहासिक मिशन का हिस्सा बनने के लिए लोगों से नाम मंगाए थे। नासा ने बताया था कि मई तक करीब 11 लाख 37 हजार 202 नाम उन्हें मिले थे, जिन्हे मेमोरी कार्ड के जरिए यान के साथ भेजा गया है।

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