महिलाओं को संसद पहुंचाने में हम काफी पीछे, बस ईरान से ही आगे हैं हम

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नई दिल्ली। आजकल हर जगह महिलाओं को हक देने की बात होती है, लेकिन उनके लिए आरक्षण का बिल अब तक संसद से पास नहीं हो सका है। इसकी बड़ी वजह हमारे सिस्टम की गड़बड़ी है। संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें हैं। बावजूद इसके हम दुनिया के तमाम देशों में महिलाओं को सांसद बनाने में भी पीछे हैं। हालत ये है कि हम इस मामले में सिर्फ ईरान से ही आगे हैं।

अफ्रीकी देश रवांडा सबसे आगे
2017 के आंकड़ों के मुताबिक संसद में महिलाओं के मामले में अफ्रीकी देश रवांडा सबसे आगे है। पिछड़े महाद्वीप के तौर पर पहचाने जाने वाले अफ्रीका के रवांडा की संसद में 61 फीसदी महिलाएं हैं। जबकि, दक्षिण अमेरिका में साम्यवादी शासन वाले क्यूबा की संसद में 49 फीसदी महिलाएं हैं।

भारत और ईरान में सबसे कम महिला सांसद
भारत और ईरान में सबसे कम महिला सांसद हैं। महिलाओं के लिए कठोर नियम और कायदे बनाने वाले ईरान की संसद में 6 फीसदी ही महिलाएं हैं। जबकि, भारत की संसद में 12 फीसदी महिलाएं हैं।

अन्य देशों की संसद में ये है हाल
आइसलैंड की संसद में 48 फीसदी महिलाएं हैं। फ्रांस में 39 फीसदी, स्पेन में 39 फीसदी, जर्मनी में 37 फीसदी, ब्रिटेन में 32 फीसदी, ऑस्ट्रेलिया में 29 फीसदी, चीन में 24 फीसदी, अमेरिका में 19 फीसदी और रूस की संसद में 16 फीसदी ही महिलाएं हैं।

हमारे देश में इन महिलाओं को मिले हैं बड़े पद
हमारे देश की बात करें, तो सुमित्रा महाजन लोकसभा अध्यक्ष हैं। जबकि, कैबिनेट मंत्री के तौर पर सुषमा स्वराज विदेश मंत्रालय और निर्मला सीतारमण रक्षा मंत्रालय संभालती हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ममता बनर्जी बैठी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी भी बतौर ताकतवर महिला चर्चा में रही हैं। बायोकॉन की चेयरमैन किरण मजुमदार शॉ भी चर्चित महिला हैं। वहीं, अंबानी खानदान की बहू नीता और उनकी बेटी ईशा अंबानी भी चर्चित महिलाओं में शुमार हैं। नीता ने मुंबई इंडियंस नाम की आईपीएल टीम खरीद रखी है। जबकि ईशा अंबानी रिलायंस जिओ की कर्ताधर्ता हैं।

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