हर साल बढ़ती है इस शिवलिंग की लंबाई, विज्ञान भी अचंभित

52 0

छतरपुर। मध्य प्रदेश का विश्व प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र खजुराहो अपनी कलाकृतियों के लिए मशहूर है। साथ ही इसे एक तीर्थ स्थल के रूप में भी जाना जाता है। यहां एक समय में 85 मंदिर होते थे, लेकिन अब गिने-चुने मंदिर ही बचे हैं। 9वीं सदी में बने इन मंदिरों को शक्ति पूजा का बड़ा केंद्र माना जाता था। खजुराहो में ही मतंगेश्वर महादेव का एक ऐसा मंदिर भी है, जहां शिवलिंग 18 फीट ऊँचा है। यह शिवलिंग 9 फीट जमीन के अंदर और उतना ही बाहर है। कहा जाता है कि हर साल इस शिवलिंग की ऊंचाई बढ़ जाती है।

शरद पूर्णिमा को तिल के बराबर बढ़ती है लंबाई

मंदिर के पुजारी अवधेश अग्निहोत्री बताते हैं कि हर साल कार्तिक माह की शरद पूर्णिमा के दिन शिवलिंग की लंबाई एक तिल के आकार के बराबर बढ़ जाती है। पुजारी ने बताया कि मतंगेश्वर भगवान के शिवलिंग की लंबाई को पर्यटन विभाग के कर्मचारी बाकायदा इंची टेप से नापते हैं और लंबाई पहले से कुछ ज्यादा मिलती है। खास बात यह है कि शिवलिंग जितना ऊपर की ओर बढ़ता है, ठीक उतना ही नीचे की तरफ भी बढ़ता है। वैज्ञानिक भी इसे जानकर अचंभित हैं। यह चमत्कार देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है।

खजुराहो के मतंगेश्वर महादेव मंदिर में स्थित शिवलिंग, हर साल बढ़ जाती है जिसकी लंबाई

कैसे पड़ा मतंगेश्‍वर महादेव नाम ?

इस मंदिर के बारे में एक पौराणिक कथा है। कथा के अनुसार, भगवान शंकर के पास एक मरकत मणि थी, जिसे शिव ने पांडवों के भाई युधिष्ठिर को दे दिया था। युधिष्ठिर के पास से वह मणि मतंग ऋषि के पास पहुंची और उन्होंने उसे राजा हर्षवर्मन को दे दिया। राजा हर्षवर्मन ने मंदिर बनवाते समय सुरक्षा की दृष्टि से मतंग ऋषि द्वारा दी गई मणि को 18 फीट के शिवलिंग के बीच गाड़ दिया। इसकी वजह से ही इनका नाम मतंगेश्वर महादेव पड़ा।

920 ईस्‍वी में हुआ था मंदिर का निर्माण

इतिहासकारों के मुताबिक मतंगेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 920 ईस्‍वी के करीब चंदेला राजा हर्षवर्मन ने करवाया था। खजुराहो के पुरातत्व मंदिरों में यही इकलौता ऐसा मंदिर है, जिसमें अब भी पूजा-पाठ होता है। इसे खजुराहो में सबसे ऊंचा मंदिर माना जाता है। खजुराहो में भगवान मतंगेश्वर की बड़ी महिमा है। यहां के घरों में बिना मतंगेश्वर की पूजा के कोई शुभ काम नहीं होता। यह परम्‍परा सदियों से चली आ रही है।

पिरामिड शैली में बना है मंदिर

बालू पत्थर से बना हुआ यह मंदिर हालांकि शिल्पकारी की दृष्टि से बहुत ही साधारण है और इसे रचना की दृष्टि से ब्रह्मा के मंदिर का ही विशाल रूप कह सकते हैं। मंदिर की छत वर्माकार, सुंदर और विशाल है। गर्भगृह के तीन ओर अहातेदार झरोखे हैं, जिनमें से उत्तरी झरोखे से होकर नीचे की ओर सीढ़ियां बनी हैं। मंदिर का एक ही शिखर पिरामिड शैली का है। प्रवेश द्वार के ऊपर शिखर पर गड़े हुए मुकुट से शिखर का सौंदर्य देखते ही बनता है।

Related Post

कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने गए शिवसैनिक हिरासत में

Posted by - December 6, 2017 0
पूर्व मुख्‍यमंत्री फारूक अब्‍दुल्‍ला ने दी थी केंद्र सरकार को चुनौती जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में लाल चौक पर तिरंगा…

राममंदिर से ध्‍यान भटकाने को भाजपा ने खड़ा किया ताजमहल विवाद : हिन्‍दू महासभा

Posted by - October 31, 2017 0
हिन्दू महासभा ने बीजेपी पर लगाया राममंदिर निर्माण में देरी का आरोप राष्‍ट्रीय मंत्री संजीव सक्‍सेना बोले – ताजमहल विवाद…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *