OMG: जान बचानी है तो बंद कर दीजिए हैंड सैनिटाइजर्स का इस्तेमाल !

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नई दिल्ली। लोग आजकल खूब हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हैं। छोटी-छोटी शीशियों में ये मिलता है और महिलाएं इसे बैग में रख लेती हैं। बाहर जब कुछ खाने-पीने का मन हो, तो शीशी निकालकर दो बूंद हथेली पर डालती हैं और दोनों हाथों को मलकर उन्हें लगता है कि सारे वायरस और बैक्टीरिया खत्म हो गए, लेकिन हकीकत इसके उलट है। जिस हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करके आप समझते हैं कि बीमारियों से बच गए, वो ऐसी बीमारी भी दे सकता है कि जान के लाले भी पड़ सकते हैं।
 
ये है हैंड सैनिटाइजर्स की हकीकत:-

-ज्यादातर सैनिटाइजर्स में 60 फीसदी अल्कोहल होता है। इससे कीटाणु पूरी तरह नहीं मरते। इससे ज्यादा कीटाणु तो साबुन से हाथ धोने से मर जाते हैं।

-जिस हैंड सैनिटाइजर में अल्कोहल कम होता है, उसमें ट्राइक्लोसेन ज्यादा होता है। ये ताकतवर बैक्टीरिया निरोधी होता है। इसके लगातार इस्तेमाल से खांसी और जुकाम से सुरक्षा खत्म हो जाती है।

-सैनिटाइजर के लगातार इस्तेमाल से त्वचा संबंधी बीमारी हो सकती है।

-हैंड सैनिटाइजर में मिलने वाला बिसफेनॉल ए रसायन से कैंसर जैसी बीमारी भी हो सकती है।

-कई सैनिटाइजर्स में फालेट्स होते हैं। सूंघने या दूसरे तरीके से शरीर को फालेट्स नुकसान करते हैं। फर्टिलिटी भी खत्म हो सकती है।

-यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न की रिसर्च कहती है कि सैनिटाइजर्स से तमाम बैक्टीरिया सुपरबग में बदल रहे हैं। इससे भी जान को खतरा होता है।

-शरीर के लिए अच्छे बैक्टीरिया भी सैनिटाइजर्स से मर जाते हैं। इससे आपके स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ जाता है।

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