लैपटॉप और मोबाइल छीन लेते हैं आंखों की रोशनी, ऐसे बच सकते हैं आप

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वाशिंगटन। अगर आप बहुत समय तक लैपटॉप पर काम करते हैं या स्मार्टफोन और टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान। ऐसा भी हो सकता है कि एक दिन आपको दिखना ही बंद हो जाए। जी हां। ऐसा हो सकता है और ये जानकारी एक रिसर्च से सामने आई है।
 
क्या कहती है रिसर्च ?

अमेरिका के ओहायो में यूनिवर्सिटी ऑफ टोलेडो के शोध करने वालों ने गैजेट्स के आंखों पर पड़ने वाले असर पर रिसर्च की है। रिसर्च से पता चला कि लैपटॉप, स्मार्टफोन और टैबलेट की स्क्रीन से नीले रंग की रोशनी निकलती है। ये रोशनी ही आंखों में मैक्युलर डिजेनेशन नाम की बीमारी पैदा करती है और इससे आंखों की रोशनी खत्म तक हो सकती है।

नीली रोशनी से आंखें कैसे होती हैं खराब ?

रिसर्च करने वालों के मुताबिक गैजेट्स से निकलने वाली नीली रोशनी के असर से 50 से 60 साल की उम्र वालों की नजरें कमजोर होती देखी गईं। पता चला कि नीली रोशनी से रेटिना में रोशनी ग्रहण करने वाले फोटोरिसेप्टर सेल नष्ट होने से ऐसा हुआ। आंखों की पुतलियों से होकर नीली रोशनी भीतर जाती है और लेंस से होती हुई कॉर्निया पर पड़ती है। इससे रंग को पहचानने वाली फोटोरिसेप्टर सेल नष्ट हो जाते हैं। ये सेल नष्ट होते हैं, लेकिन इनकी जगह नए सेल नहीं बनते।

कैंसर सेल भी हो जाते हैं नष्ट

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में छपी रिसर्च में बताया गया है कि नीली रोशनी से दिल के सेल, दिमाग के न्यूरॉन और कैंसर सेल भी नष्ट हो जाते हैं।

इस तरह आंखों को बचाएं

मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट के स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से आंखों को बचाने के लिए ऐसे सनग्लास पहनने चाहिए, जो अल्ट्रावायलेट रोशनी को रोक सकें। साथ ही अंधेरे में लैपटॉप, मोबाइल और टैबलेट न देखें।

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