अयोध्या में नहीं, थाईलैंड के अयुथ्थया में बनने लगा भव्य राम मंदिर

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नई दिल्‍ली भारत की अयोध्‍या में तो राम जन्‍मभूमि पर मंदिर निर्माण का काम अभी नहीं शुरू हुआ, लेकिन थाईलैंड के अयुथ्थ्या में भव्‍य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है। बुधवार (8 अगस्‍त) को अयुथ्थ्या में राम जन्मभूमि निर्माण न्यास ट्रस्ट द्वारा भूमि पूजन तथा पूरे धार्मिक अनुष्ठान के बाद भव्य राममंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो गया।

क्‍या कहा ट्रस्‍ट ने

राम जन्मभूमि निर्माण न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जनमजेय शरण ने बैंकाक से यहां की न्‍यूज एजेंसी को फोन पर बताया, ‘भारत में अयोध्या में राममंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए रामभक्तों ने थाईलैंड में राम मंदिर का निर्माण कार्य आरंभ कर दिया है। हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद है कि यह हमारे पक्ष में आएगा।’ उन्‍होंने यह भी कहा कि अयुथ्थ्या में मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में भी राममंदिर बनने का रास्ता निकलेगा। बता दें कि इस मंदिर का निर्माण राम जन्मभूमि निर्माण न्यास ट्रस्ट ही करा रहा है।

कभी बैंकाक की राजधानी थी अयुथ्थ्या 

थाईलैंड में राममंदिर का निर्माण चाव फ्राया नदी के किनारे हो रहा है, जो शहर के बीचोंबीच बहती है। भारत में भी अयोध्या सरयू नदी के तट पर बसी है। इतिहास में दर्ज है कि 15वीं सदी में थाईलैंड की राजधानी को अयुथ्थ्या कहा जाता था और स्थानीय भाषा में इसे अयोध्या कहते हैं। बैंकॉक को महेंद्र अयोध्या भी कहते हैं। ऐसा इसलिए है कि लोगों का मानना है कि यह इंद्र द्वारा निर्मित महान अयोध्या है। यही कारण है कि थाईलैंड के जितने भी राजा हुए हैं, सभी ने इसी अयोध्या में रहकर काम किया।

हिन्‍दू धर्म में है गहरी आस्‍था

दक्षिण पूर्व एशिया के बौद्ध बहुल देश थाईलैंड में हिन्‍दू धर्म के प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है। थाईलैंड के लोगों का न केवल हिन्‍दू मंदिरों और देवताओं में गहरा विश्‍वास है,  बल्कि अपने राजा को भी राम का वंशज मानकर उसे विष्णु के अवतार की संज्ञा देते हैं। थाईलैंड में हिन्‍दू देवी-देवताओं और इससे जुड़े प्रतीक कई जगहों पर देखने को मिलते हैं। थाईलैंड का राष्ट्रीय चिह्न भी गरुड़ है। बैंकॉक के हवाई अड्डे के स्वागत हाल के अंदर भी समुद्र मंथन का दृश्य बना हुआ है।

थाई संस्‍कृति में भी रामायण

थाई संस्कृति एवं साहित्य का रामायण और पुरुषोत्तम राम से इस कदर जुड़ाव है कि यहां के राजा अपने नाम के साथ ‘राम’ लगाया करते थे। चक्री वंश के राजा के नाम के साथ भी ‘राम’ शब्द जुड़ा है। 18वीं शताब्दी में जब बर्मा के सैनिकों ने थाईलैंड की राजधानी पर कब्जा किया तो एक नए शासक का उदय हुआ। उसने खुद को ‘राम प्रथम’ कहा और एक शहर की स्थापना की जो आज बैकॉक के नाम से जाना जाता है। इसी राजा ने राम कियेन लिखी जिसे स्थानीय भाषा में रामायण कहा जाता है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय महाकाव्य का दर्जा दिया था।

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