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ट्रिपल तलाक बिल में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी, मजिस्ट्रेट दे सकेंगे जमानत

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नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने एक बार में तीन तलाक और निकाह हलाला संबंधी मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 में कुछ संशोधनों को मंजूरी दे दी। गुरुवार (9 अगस्‍त) को हुई कैबिनेट की बैठक में तीन तलाक बिल पर राजनीतिक गतिरोध खत्म करने के लिए तीन अहम संशोधनों को स्‍वीकृति दी गई। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी से नए बिल को समर्थन देने की अपील की है। बता दें कि यह बिल लोकसभा से पास हो चुका है।

किन संशोधनों को दी गई मंजूरी ?

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्रिपल तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) बिल में संशोधनों की घोषणा करते हुए कहा कि ट्रिपल तलाक एक गैर-ज़मानती अपराध बना रहेगा, लेकिन मजिस्ट्रेट के पास दोषी को ज़मानत देने का अधिकार होगा। साथ ही इस बिल में एक और संशोधन किया गया है जिसके अनुसार, अब पीड़िता या उसके खून के रिश्ते के किसी शख्स को एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार होगा। रविशंकर प्रसाद ने बताया कि संशोधित बिल में कोर्ट की इजाज़त से समझौते का भी प्रावधान होगा।

विपक्ष ने दी सधी प्रतिक्रिया

बता दें कि विपक्ष के विरोध की वजह से यह बिल राज्यसभा में लंबे समय से अटका पड़ा है, हालांकि सरकार इसे लोकसभा में पारित करा चुकी है। कांग्रेस और एनसीपी ने सरकार के फैसले पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने एक न्‍यूज चैनल से कहा कि सरकार ने जो बदलाव किया है वो आंशिक तौर पर ही कांग्रेस की चिंताओं को दूर करता है। उन्‍होंने कहा कि बिल जब राज्यसभा में आएगा, तब पार्टी अपना रुख साफ करेगी। वहीं एनसीपी नेता माजिद मेनन ने कहा कि इस फैसले से कुछ राहत तो ज़रूर है लेकिन इस बिल को राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए। उन्‍होंने भी बिल के राज्यसभा में आने के बाद अपना रुख साफ करने की बात कही। बता दें कि विपक्ष की मांगों में इस बिल में जमानत का प्रावधान जोड़ना भी शामिल था। अब यह देखना दिलचस्‍प होगा कि सरकार नए बिल पर राजनीतिक सहमति बनाने में कितना कामयाब हो पाती है।

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