यूपी के 17 जिलों के भूजल में आर्सेनिक, लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा

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लखनऊ। यूपी के 17 जिलों में भूजल में आर्सेनिक नाम का खतरनाक तत्व मिला हुआ है। इस पानी के इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों ने जनता को इससे बचाने के लिए ठोस पहल नहीं की है।

इन इलाकों में भूजल में है आर्सेनिक

26 जुलाई 2018 को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने सवाल के जवाब में बताया था कि अंबेडकर नगर में 10, आजमगढ़ में 2, बहराइच में 538, बलिया में 107, बलरामपुर में 1, बस्ती में 7, देवरिया में 8, गोरखपुर में 8, लखीमपुर खीरी में 23, कुशीनगर में 19, लखनऊ में 1, महाराजगंज में 3, मऊ में 8, संभल में 1, संत कबीरनगर में 6, सिद्धार्थनगर में 5 और सोनभद्र में 1 मजरे में भूजल में आर्सेनिक पाया गया है।

राज्य सरकार पर मढ़ दिया दायित्व

जब उमा से एक अन्य सवाल पूछा गया, तो उन्होंने लोकसभा में बताया कि आर्सेनिक से आम लोगों के स्वास्थ्य को खतरा तो है, लेकिन इससे बचाने के लिए राज्य सरकार को कदम उठाना होता है। केंद्र सरकार सिर्फ तकनीकी और वित्तीय मदद देती है। उन्होंने बताया था कि 2015-16 में यूपी सरकार ने इस दिशा में काम करने के लिए 1317.08 करोड़ रुपए खर्च किए। 2016-17 में इस मद में 891.96 करोड़ खर्च हुए। 2017-18 में ये रकम 990.60 करोड़ थी। जबकि, 2018-19 में भूजल में आर्सेनिक को खत्म करने के लिए 1240 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

बहराइच में सबसे ज्यादा मजरे प्रभावित

केंद्र सरकार के मुताबिक यूपी के बहराइच जिले में सबसे ज्यादा 538 मजरों में भूजल में आर्सेनिक पाया गया है। ये आंकड़ा 2013 का है। जांच में आर्सेनिक का पता चलने के बाद सरकार की ओर से नलों में आर्सेनिक फिल्टर लगवाए गए थे, लेकिन कुछ महीने बाद ही ये खराब हो गए। बहराइच में भूजल में 250 पीपीबी यानी पार्ट्स पर बिलियन आर्सेनिक मिला, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ये मात्रा 10 पीपीबी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

ज्यादा गहराई पर ज्यादा आर्सेनिक

सॉयल की प्रोफाइलिंग यानी जांच से पता चला कि बहराइच में जो हैंडपंप 100 फिट से ज्यादा गहराई तक लगे थे, उनके पानी में आर्सेनिक ज्यादा था। आर्सेनिक से बहराइच के तमाम मजरों में लोगों को गांठ का दर्द, पैरों में छाले और दांत पर काले निशान पड़ने की शिकायत है। बता दें कि आर्सेनिक लगातार शरीर में जाता रहे, तो कैंसर का भी खतरा होता है।

देशभर में खतरनाक होता जा रहा है भूजल

भूजल का एक तो लगातार दोहन हो रहा है। साथ ही इसमें आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे तत्वों की मात्रा ज्यादा होने से लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है। पेयजल और सफाई संबंधी मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 1 करोड़ 47 लाख लोगों को आर्सेनिक और फ्लोराइड से खतरा है। मंत्रालय ने पाया था कि देश में 16 हजार 889 इलाकों में भूजल में आर्सेनिक है। जबकि 12 हजार 29 इलाकों में भूजल में फ्लोराइड पाया गया था। इसके अलावा 2 हजार 384 इलाकों में भारी धातुओं के होने और 23 हजार 613 इलाकों में पेयजल में खतरनाक लोहा मिला। जबकि, भारत के 1809 इलाकों में भूजल में खतरनाक नाइट्रेट भी पाया गया।

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