भारत में हर 10 में 6 बच्चों को नहीं मिलता मां का दूध, मौत की आशंका जाती है बढ़

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नई दिल्ली। भारत में पैदा होने वाले हर 10 में से 6 बच्चों को उनकी माएं तुरंत स्तनपान नहीं करातीं। इससे बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा होता है। इसकी वजह ये है कि बच्चों को पहले घंटे में मां का दूध मिलने पर उनमें बीमारियों से लड़ने की ताकत पैदा होती है। जबकि, मां का दूध न मिलने से उनका शरीर इसके लिए सक्षम नहीं बन पाता है।

पड़ोसी देशों के मुकाबले यहां हैं हम
साल 2005 में महज 23.1 फीसदी माएं अपने पैदा हुए बच्चे को स्तनपान कराती थीं। जबकि, 2015 में ये आंकड़ा बढ़कर 41.5 फीसदी हो गया। देखने में तो ये बड़ा परिवर्तन लगता है। आंकड़ा बताता है कि बच्चों को स्तनपान कराने में महिलाएं रुचि ले रही हैं, लेकिन पड़ोसी देशों के साथ आंकड़ों को मिलाएं, तो हम कई देशों से पीछे हैं। पाकिस्तान में 18 फीसदी माएं ही बच्चों को स्तनपान कराती हैं। जबकि श्रीलंका में 90.3 फीसदी माएं बच्चों को जन्म के पहले घंटे अपना दूध पिलाती हैं। वहीं, बांग्लादेश में ऐसी महिलाओं का प्रतिशत 50.8 है। नेपाल में ये आंकड़ा 54.9 है और चीन में 26.4 फीसदी माएं अपने बच्चे को स्तनपान कराती हैं।

पैदा होते ही दूध पिलाना क्यों जरूरी ?
बच्चे के जन्म के तुरंत बाद एक घंटे के भीतर उसे मां का दूध देने से कोलोस्ट्रम मिलता है। ये काफी पौष्टिक होता है और इसमें वो एंटीबॉडी होते हैं, जो बच्चे को किसी तरह के इन्फेक्शन से बचाते हैं। बता दें कि भारत में नवजात बच्चों की मौत का आंकड़ा प्रति 1 हजार बच्चों में 28 है। ये आंकड़ा साल 1990 में 52 था। जिन नवजात को जन्म के दो से 23 घंटे बाद मां का पहला दूध मिलता है, उनमें मौत की आशंका 33 फीसदी ज्यादा होती है।

सीजेरियन मामलों में स्तनपान कम होता है
शोध से पता चला है कि 51 देशों में सीजेरियन यानी सर्जरी के जरिए जन्म लेने वाले बच्चों को प्राकृतिक तरीके से जन्म लेने वाले बच्चों के मुकाबले कम स्तनपान कराया जाता है। बता दें कि भारत में जहां साल 2005-06 में सीजेरियन से 8.5 फीसदी बच्चे पैदा होते थे, वहीं 2015-16 में ये आंकड़ा बढ़कर 17.2 फीसदी हो गया। जाहिर है कि उन बच्चों की तादाद बढ़ी, जिन्हें जन्म के एक घंटे के भीतर मां का दूध नहीं पिलाया गया।

गोवा में स्तनपान कराती हैं माएं
आंकड़ों के मुताबिक गोवा में 75.4 फीसदी बच्चों को जन्म के पहले घंटे मां अपना दूध पिलाती हैं। 73.4 फीसदी के साथ मिजोरम दूसरे, 69.7 फीसदी के साथ सिक्किम तीसरे और 68.9 फीसदी के साथ ओडिशा की माएं चौथे स्थान पर हैं। जबकि, यूपी में सिर्फ 25.4 फीसदी, राजस्थान में 28.4 फीसदी और उत्तराखंड में 28.8 फीसदी माएं ही नवजात को स्तनपान कराती हैं।

दूध की जगह नवजात को ये देने पर जोर
जिन राज्यों में स्तनपान कराने वाली माओं का प्रतिशत कम है, वहां नवजात को पानी के साथ शहद देने का चलन है। इन राज्यों में सबसे ऊपर यूपी का नाम है। यूपी में 41.5 फीसदी बच्चों को मां के दूध की जगह शहद और पानी पिलाया जाता है। यूपी के बाद 39.1 फीसदी के साथ उत्तराखंड और 32.1 फीसदी के साथ पंजाब का नंबर है। पूरे देश के आंकड़े देखें, तो 21.1 फीसदी नवजातों को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने की जगह पानी और शहद पिलाया जाता है।

समाज के ये तबके कम कराते हैं स्तनपान
रिसर्च से पता चलता है कि सबसे अमीर और सबसे गरीब वर्ग में नवजात को स्तनपान सबसे कम कराया जाता है। अमीर वर्ग में ये आंकड़ा 39.9 फीसदी और सबसे गरीब वर्ग में ये 38.9 फीसदी है। अन्य आय वर्ग में स्तनपान का आंकड़ा 42 फीसदी के साथ काफी बेहतर है। रिसर्च से ये भी पता चलता है कि जो महिलाएं कभी स्कूल नहीं गईं, वो भी नवजात को जन्म के एक घंटे के भीतर अपना दूध नहीं पिलाती हैं। ऐसी महिलाओं का आंकड़ा 36.4 फीसदी है। जबकि, जो महिलाएं 10-11 साल की उम्र तक स्कूल गईं, उनमें से 45.7 फीसदी बच्चे को स्तनपान कराती हैं।

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