एम करुणानिधि : 80 साल के कॅरियर में कभी नहीं हारे चुनाव, 5 बार रहे सीएम

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चेन्‍नई। महज 14 साल की उम्र में हिंदी विरोध के साथ राजनीति में कदम रखने वाले मुथुवेल करुणानिधि का जन्म 3 जून, 1924 को तिरुवरूर जिले के तिरुकुवालाई गांव में हुआ था। उन्होंने 3 शादियां कीं। पहली पत्‍नी का नाम पद्मावती, दूसरी का दयालु और तीसरी का रजति है। पहली पत्‍नी पद्मावती का देहांत हो चुका है। उन्‍होंने तमिल फिल्मों में नाटककार और पटकथा लेखक के तौर पर भी काम किया। उन्होंने 20 साल की उम्र में ज्यूपिटर पिक्चर्स में पटकथा लेखक के रूप में कॅरियर शुरू किया। उनकी पहली ही फिल्म ‘राजकुमारी’ काफी लोकप्रिय हुई।

14 साल की उम्र में आए राजनीति में

जस्टिस पार्टी के अलागिरीस्वामी के भाषण से प्रभावित होकर करुणानिधि ने राजनीतिक जीवन में कदम रखा, तब उनकी उम्र महज 14 साल थी। वे हिंदी विरोधी आंदोलन से भी जुड़े। 1947 में जब जस्टिस पार्टी के पेरियार और सीएन अन्नादुरई में मतभेद हुए तो 1949 में अन्नादुरई ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) का गठन किया। करुणानिधि अन्नादुरई के साथ रहे। डीएमके के संस्‍थापक सदस्‍यों में एमजी रामचंद्रन भी थे, लेकिन अन्‍नादुरई के निधन के बाद करुणानिधि और एमजीआर में मतभेद पैदा हो गए। 1972 में एमजीआर ने द्रमुक से अलग होकर ऑल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIDMK) का गठन किया।

1969 में पहली बार बने सीएम

1953 में कलाकुडी आंदोलन में शामिल होने के बाद करुणानिधि का राजनीतिक ग्राफ काफी ऊंचा हो गया। 1957 में वे द्रमुक के टिकट पर तिरुचिरापल्ली की कुलथलाई सीट से पहली बार मद्रास स्टेट असेंबली में चुने गए। द्रमुक ने 1967 में मद्रास स्टेट में पहली बार सरकार बनाई। सीएन अन्नादुरई राज्य के मुख्यमंत्री बने और करुणानिधि बने पीडब्‍लूडी मंत्री। 1969 में मद्रास स्टेट से अलग होकर तमिलनाडु राज्य बना। अन्नादुरई 14 जनवरी, 1969 को तमिलनाडु के पहले मुख्यमंत्री बने, लेकिन 20 दिन बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। उनकी जगह वीआर नेदुचेझियान अंतरिम मुख्यमंत्री बने, लेकिन 7 दिन बाद यानी 10 फरवरी, 1969 को करुणानिधि पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

13 बार विधायक रहने का रिकॉर्ड

करुणानिधि 5 बार 10 फरवरी 1969 से 4 जनवरी 1971, 15 मार्च 1971 से 31 जनवरी 1976, 27 जनवरी 1989 से 30 जनवरी 1991, 13 मई 1996 से 13 मई 2001, 13 मई 2006 से 15 मई 2011 तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे। उनके नाम सबसे ज्यादा 13 बार विधायक बनने का रिकॉर्ड भी है। अपने 80 साल के कॅरियर में वे कभी भी कोई चुनाव नहीं हारे।

विवादों में भी रहे

करुणानिधि ने रामसेतु परियोजना को लेकर कई विवादित बयान दिए। एक बार उन्होंने रामसेतु पर सवाल उठाते हुए कहा था, ‘इसका किसी के पास कोई प्रमाण है?’ करुणानिधि ने अप्रैल 2009 में स्वीकार किया कि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) प्रमुख प्रभाकरण उनका अच्छा दोस्त था। बता दें कि लिट्टे ने ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कराई थी। राजीव गांधी हत्याकांड की जांच करने वाले जैन आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में प्रभाकरण और करुणानिधि के संबंधों के बारे में कहा था। करुणानिधि भ्रष्‍टाचार के आरोप में 30 जून, 2001 को गिरफ्तार भी हुए थे। उस समय तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जयललिता थीं।

46 साल तक पहना काला चश्मा

करुणानिधि की 1971 में अमेरिका के जॉन हॉपकिंस अस्पताल में आंखों का ऑपरेशन हुआ था। इसके बाद से 46 साल तक उन्होंने काला चश्मा पहना। करुणानिधि ने 2017 में डॉक्टरों की सलाह पर काला चश्मा पहनना छोड़ा था। हालांकि इसके बदले में उनके लिए इम्पोर्टेड चश्मा मंगवाया गया जो थोड़ा टिंटेड था। 40 दिन की खोजबन के बाद उनका ये नया चश्मा फाइनल किया गया था।

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