भारत में क्राइम की भरमार, लेकिन जेलों में अपराधी से कहीं ज्यादा विचाराधीन कैदी

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  • दुनिया के अन्‍य देशों के मुकाबले भारत में कैदियों की संख्‍या बहुत कम, अमेरिका टॉप पर

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्‍यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि पड़ोसी देशों और दुनिया के अन्‍य कई देशों के मुकाबले भारत में आबादी के लिहाज से जेलों में बंद कैदियों की संख्‍या बहुत कम है। इंस्टीट्यूट फॉर क्रिमिनल पॉलिसी रिसर्च (ICPR) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में जहां प्रति एक लाख की आबादी में से 666 लोग जेलों में बंद हैं, वहीं भारत में यह आंकड़ा महज 33 है। भारत में फिलहाल 4.20 लाख लोग विभिन्न जेलों में बंद हैं। प्रस्‍तुत है धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी की रिपोर्ट –

किन देशों में कितने कैदी

अगर दुनिया भर के देशों की जेलों में बंद कैदियों की बात करें तो इसमें अमेरिका सबसे टॉप पर है। अमेरिका की जेलों में कुल 21.45  कैदी बंद हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत में यह संख्‍या 4.20 लाख है, जो यहां की आबादी को देखते हुए बहुत ज्‍यादा नहीं कही जा सकती। इनमें महिला कैदियों की संख्‍या लगभग 18 हजार है। यूनाइटेड किंगडम में कैदियों की संख्‍या बहुत कम महज 85 हजार है, वहीं पाकिस्‍तान की जेलों में सिर्फ 80 हजार कैदी हैं। आइए जानते हैं दुनिया की और जेलों में कहां कितने कैदी बंद हैं –

वर्ष 2017 में दुनिया की जेलों में कैदियों की संख्या (लाख में), स्रोत : OECD

प्रति लाख आबादी पर कहां कितने कैदी

आर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) ने दुनियाभर की जेलों में बंद कैदियों के आंकड़े जारी किए हैं। OECD के अनुसार, वर्ष 2017 में प्रति लाख आबादी पर अमेरिका में सबसे ज्‍यादा 666 कैदी हैं। इसके बाद इजरायल का नंबर आता है, जहां प्रति लाख आबादी पर यह आंकड़ा 265 है। इनके अलावा टर्की में 254, चिली में 237, चेक रिपब्लिक में 216, एस्‍टोनिया में 213, न्‍यूजीलैंड में 210, पोलैंड में 196, मेक्सिको में 192, ऑस्‍ट्रेलिया में 162, इंग्‍लैंड व वेल्‍स में 145, स्‍पेन में 130, कनाडा में 114, फ्रांस में 101, इटली में 93, जर्मनी में 76, जापान में 45 कैदी प्रति लाख आबादी में जेलों में बंद हैं। भारत में यह आंकड़ा इन देशों से काफी कम सिर्फ 33 है।

अपराध तो बढ़े लेकिन दोषसिद्ध‍ि बहुत कम

भारत में हर साल अपराध की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। NCRB के आंकड़े के अनुसार, वर्ष 2016 देश में संज्ञेय अपराध की कुल 48 लाख 31 हजार 515 घटनाएं दर्ज हुईं जो वर्ष 2015 की तुलना में 2.6 फीसदी ज्‍यादा हैं। इतनी बड़ी संख्‍या में अपराध होने के बावजूद कैदियों की संख्‍या इतनी कम होना यह दर्शाता है कि जो मामले दर्ज भी होते हैं, उनमें बहुत कम लोग दोषी साबित हो पाते हैं। यह आंकड़ा हमारी पुलिस और अभियोजना प्रणाली की पोल भी खोलता है।

भारत में विचाराधीन कैदी

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारत में केन्द्रीय कारागार और राज्य सरकारों की जेलों में कुल 4.20 लाख कैदी बंद हैं। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि इनमें से 2.50 लाख से ज्‍यादा यानी दो तिहाई से अधिक विचाराधीन कैदी हैं। यही नहीं, अपने भाग्य के फैसले के इंतजार में कैद इन लोगों में लगभग 75 फीसदी कैदी छोटे-मोटे अपराधों में बंद हैं। इनमें से कई कैदी तो ऐसे हैं जो दोषी ठहराए जाने पर मिलने वाली सजा से अधिक या लगभग उसकी आधी से अधिक सजा पूरी कर चुके हैं।

भारत में जेलों की संख्‍या और उनकी क्षमता

NCRB द्वारा जारी 2015 के आंकड़ों के अनुसार भारत में जेलों की कुल संख्‍या 1401 है। इन जेलों में कुल कैदियों को रखने की क्षमता 3 लाख 66 हजार 781 है। इनमें 134 सेंट्रल जेल, 379 जिला जेल, 741 उप जेल, 18 महिला जेल, 63 खुली जेल, 20 सुधार गृह और 43 विशेष जेल शामिल हैं। सेंट्रल जेल में जहां 1 लाख 59 हजार 158 कैदियों को रखने की क्षमता है, वहीं जिला जेलों में यह क्षमता 1 लाख 37 हजार 972 है।

जेलों में क्षमता से ज्‍यादा कैदी पर कोर्ट की फटकार

सुप्रीम कोर्ट में इसी साल मार्च महीने में जेलों की दशा पर एक मामले की सुनवाई के दौरान बताया गया कि देशभर के 13 सौ से ज्यादा जेलों में से ज्यादातर में क्षमता से दोगुने कैदी रह रहे हैं। कुछ मामलों में तो यह आंकड़ा 600 फीसदी तक है। न्यायमूर्ति एम.बी.लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने कहा, मौजूदा आंकड़ों से साफ है कि कैदियों के मानवाधिकारों के प्रति राज्य सरकारों का रवैया ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने देश में जेल कर्मचारियों की कमी पर भी गहरी चिंता जताई है।

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