पिछली बार के मुकाबले शिवसेना को 70 फीसदी कम मिला चंदा, फिर भी टॉप पर

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पिछली बार के मुकाबले शिवसेना को 70 फीसदी कम मिला चंदा, फिर भी टॉप पर

नई दिल्ली। क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों को भी चंदा मिलता है और 2016-17 के आंकड़े बताते हैं कि चंदा जुटाने में सबसे आगे शिवसेना है। हालांकि, ये भी हकीकत है कि उसे 2015-16 के मुकाबले 70 फीसदी कम चंदा मिला है।

एडीआर ने जारी की रिपोर्ट

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को 2016-17 में 91 करोड़ 37 लाख रुपए बतौर चंदे से मिले। इनमें सबसे ज्यादा 25 करोड़ 65 लाख रुपए का चंदा शिवसेना के हिस्से आया। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी 24 करोड़ 73 लाख रुपए के साथ चंदा जुटाने में नंबर दो पर रही। चंदे की ये रकम 20 हजार या उससे ज्यादा के रूप में है। क्षेत्रीय पार्टियों को कुल 6 हजार 339 लोगों से चंदा मिला है। शिवसेना को 297 लोगों ने चंदा दिया। जबकि आम आदमी पार्टी को 3 हजार 865 लोगों ने चंदा दिया।

और पार्टियों को मिला इतना चंदा

शिरोमणि अकाली दल को 15 करोड़ 45 लाख रुपए बतौर चंदा मिला और वो तीसरे नंबर पर है। बता दें कि शिवसेना, आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने कुल चंदे का 72.05 फीसदी हिस्सा अपने नाम किया है।

इन दलों के चंदे में बढ़ोतरी

एडीआर के अनुसार असम गण परिषद, अकाली दल, जनता दल सेक्युलर, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के चंदे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नकदी से ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस को सबसे ज्यादा 65 लाख रुपए मिले। जबकि असम गण परिषद को 41.2 लाख और नगा पीपुल्स फ्रंट को 41 लाख रुपए चंदा मिला।

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