आप जानते हैं, दुनिया में सबसे ज्यादा शराब गटक जाते हैं ये देश !

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  • धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी

लखनऊ। दुनिया भर में अल्कोहल की खपत बढ़ती जा रही है। कुछ देशों में तो इसकी लत एक बड़ी समस्या का रूप ले चुकी है। कुछ लोग शौकिया शराब पीना शुरू करते हैं, लेकिन उनका ये शौक कब आदत में और फिर आदत से लत में बदल जाता है, ये उन्‍हें खुद नहीं पता चलता। ऐसे लोगों को जब पीने के लिए शराब नहीं मिलती है तो वे अपराध की ओर प्रवृत्‍त हो जाते हैं। शराब पीने से होने वाले नुकसान की जानकारी होने के बावजूद लोग इससे दूर नहीं हो पाते, यह चिंता की बात है। एक आंकड़े के अनुसार, भारत में हर साल लोग करीब 2 लाख करोड़ रुपये की शराब गटक जाते हैं। 

भारत में शराब का कारोबार

लिकर किंग के नाम से मशहूर विजय माल्या के पिता विट्ठल माल्या ने देश में पहली बार भारत निर्मित विदेशी शराब का उत्पादन किया था और आज पूरे देश में ऐसे ब्रांडों की भरमार है जिन्हें ‘भारत निर्मित विदेशी शराब’ का दर्जा हासिल है। आज शराब की खपत के मामले में भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। शराब उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, वित्त वर्ष 2015-16 में देश में शराब का कुल कारोबार करीब 28 से 31 अरब डॉलर (1.86 से 2.06 लाख करोड़ रु.) था। इसमें अंग्रेजी शराब (इंडियन मेड फॉरेन लिकर, बीआईओ व अन्य) 17 अरब डॉलर, बियर 8 अरब डॉलर और देशी शराब का कारोबार करीब 3 अरब डॉलर का हुआ।

भारत में शराब से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्‍य –

  • WHO की एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 38 प्रतिशत बढ़ गई है। साल 2003-05 में यह खपत 1.6 लीटर/वर्ष थी, जो साल 2010-12 में बढ़कर 2.2 लीटर और 2016-17 में बढ़कर 4.3 लीटर/वर्ष हो गई है।
  • वर्ष 2001 से 2011 के बीच शराब कारोबार में सात से 12 फीसदी की एनुअल ग्रोथ दर्ज की गई।
  • वर्ष 2011 के बाद इसकी रफ्तार में थोड़ी कमी आई, जबकि वर्ष 2013 में तो कारोबार में 2 से 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
  • भारत में शराब पीने वालों की संख्या 11 प्रतिशत से ज्यादा है, जबकि दुनिया में यह 16 प्रतिशत है।
  • वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान 354 करोड़ लीटर शराब गटकी गई, जबकि 214 करोड़ लीटर बियर पी गई।
  • देश में करीब 20 प्रमुख कंपनियां इस कारोबार में सक्रिय हैं, जबकि देश में अंग्रेजी शराब की करीब 55 हजार दुकानें हैं।
  • बियर का कारोबार प्रतिवर्ष 12 फीसदी की दर से बढ़ रहा है, हालांकि दुनिया में यह 3 फीसदी वार्षिक की दर से बढ़ रहा है।
  • 2019 तक भारत में अंग्रेजी शराब का कारोबार बढ़कर 26 अरब डॉलर और बियर का कारोबार 11.9 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
स्रोत : वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (सभी आंकड़े लीटर में)

भारत में शराब की खपत

भारत में कुल शराब खपत में 80 प्रतिशत हिस्सा देसी-विदेशी व्हिस्की का है। कंपनियों द्वारा समय-समय पर जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में भारत निर्मित विदेशी शराब की खपत करीब 36 फीसदी है। इसका मुख्य बाजार दक्षिण भारत है। वहीं आयातित विदेशी शराब का बाजार में हिस्सा सिर्फ 3 फीसदी है और इसकी खपत मुख्यत: देश के महानगरों में होती है। 13 फीसदी हिस्सेदारी बीयर की है जो आज देश के शहरी क्षेत्र का मुख्य पेय बनता जा रहा है। बाजार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी करीब 48 फीसदी देसी दारू की है जो पूरे देश में एक समान बिकती है।

गांवों में दवा से ज्‍यादा शराब पर खर्च

वर्ष 2016  में आई क्रोम डेटा एनालिटिक्स एंड मीडिया (क्रोम डीएम) की सर्वे रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए गए थे। इसमें बताया गया कि गांव-देहात के लोग दवाओं के मुकाबले नशे की चीजों पर ज्यादा पैसा खर्च करते हैं। ग्रामीण भारत में एक व्यक्ति इलाज पर करीब 56 रुपए खर्च करता है जबकि शराब पर 140 रुपए और तंबाकू पर 196 रुपए। यानी इलाज पर खर्च के मुकाबले नशे की चीजों का खर्च तीन गुना ज्यादा है।

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