इंदिरा नूई ने 12 साल बाद छोड़ा पेप्सिको की CEO का पद, जानिए कब होगी विदाई

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नई दिल्‍ली। कोल्ड ड्रिंक्स और फूड सेक्टर की दिग्गज अमेरिकी कंपनी पेप्सिको की CEO इंदिरा नूई इस साल अक्टबूर में अपना पद छोड़ देंगी। करीब 12 साल तक कंपनी का कारोबार संभालने के बाद वह 3 अक्टूबर को इस पद से हट जाएंगी। पेप्स‍िको ने सोमवार (6 अगस्‍त) को इसकी घोषणा की। वे वर्ष 2006 कंपनी की पहली महिला CEO बनी थीं। बता दें कि नूई को कॉर्पोरेट सेक्टर में महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के तौर पर देखा जाता रहा है।

रैमन लगुआरटा लेंगे नूई की जगह

62 वर्ष की नूई ने कंपनी के साथ 24 साल तक काम किया है। बताया जा रहा है कि 3 अक्टूबर को वह CEO का पद तो छोड़ देंगी, लेकिन 2019 की शुरुआत तक वह कंपनी की चेयरमैन के पद पर बनी रहेंगी। नूई की जगह कंपनी के प्रेसिडेंट रैमन लगुआरटा लेंगे। इस पद के लिए उनका चुनाव कंपनी के निदेशक मंडल ने किया है। लगुआरटा पिछले 22 साल से कंपनी के साथ जुड़े हैं। पिछले साल सितंबर में वे कंपनी में प्रेसिडेंट बने थे। कंपनी ने कहा है कि नूई के अलावा कंपनी के अन्य वरिष्ठ पदों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

नूई ने भारत को किया याद

पेप्सिको छोड़ने की घोषणा के साथ ही इंदिरा नूई ने ट्वीट किया – ‘भारत में परवरिश के दौरान, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे पेप्सिको जैसी असाधारण कंपनी का नेतृत्व करने का अवसर मिलेगा। इस कंपनी का नेतृत्व करना मेरे जीवन में सबसे अधिक सम्मान की बात है। मैंने जितना सोचा था, हमने लोगों के जीवन में उससे कहीं अधिक सकारात्मक असर डाला। पेप्स‍िको आज मजबूत स्थ‍िति में खड़ी है। मुझे उम्मीद है कि कंपनी आगे भी यूं ही मज‍बूती से बढ़ती रहेगी।’ बता दें कि इंदिरा नूई के कंपनी छोड़ने के बाद पेप्स‍िको के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है।

कौन हैं इंदिरा नूई ?

इंदिरा नूई का जन्म 1955 में चेन्नई में हुआ था। उनके पिता स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद में थे और दादा जिला जज थे। उन्होंने मैनेजमेंट का कोर्स आईआईएम कलकत्ता से पूरा किया। वर्ष 2001 में इंदिरा ने सीएफओ के तौर पर पेप्सिको ज्वाइन की। उसके बाद से अब तक पेप्सिको का मुनाफा 2.7 बिलियन डॉलर से बढ़कर 6.5 बिलियन डॉलर हो गया है। इंदिरा ने पेप्सिको ज्‍वाइन करने से पहले बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप, आसिया ब्राउन बोवेरी, मोटोरोला, जॉनसन एंड जॉनसन और मेटुर बर्डसेल में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। टाइम मैगजीन में ‘दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची’ में 2007 और 2008 में इंदिरा को जगह दी गई। उनकी इस उपलब्धि से देश का नाम ऊंचा हुआ। वर्ष 2007 में भारत सरकार ने इंदिरा को पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा था।

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