OMG : नीदरलैंड में गाय के गोबर से बनाई जा रही फैशनेबल ड्रेस

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  • यह स्‍टार्टअप शुरू करने वाली जलिला एसाइदी को मिला 1.40 करोड़ रुपये का अवॉर्ड  
  • गोबर के सेल्युलोज से बायो-डीग्रेडेबल प्लास्टिक और पेपर बनाने में भी मिली कामयाबी

आइंडहोवन। आपने कई तरह की फैब्रिक्‍स से ड्रेस बनाने की बात सुनी होगी, लेकिन अगर हम आपसे कहें कि गाय के गोबर से भी खूबसूरत ड्रेस बनाई जा सकती है तो यह सुनकर आप आश्‍चर्यचकित हुए बिना रहेंगे। जी हां, आपने सही सुना। यह बात सौ फीसदी सच है। नीदरलैंड के एक स्टार्टअप ने गाय के गोबर से सेल्युलोज को अलग कर फैशनेबल ड्रेस बनाने का तरीका खोज निकाला है। उनके इस तरीके ने सभी को हैरान कर दिया है।

किसने शुरू किया स्‍टार्टअप ?

नीदरलैंड की रहने वाली जलिला एसाइदी ने बायोआर्ट लैब के नाम से यह स्‍टार्टअप शुरू किया है। एसाइदी का कहना है – ‘यह फ्यूचर का फैब्रिक है। हम गोबर को वेस्ट मटेरियल के रूप में जानते-समझते हैं। इसे गंदा और बदबूदार मानते हैं, लेकिन हमें गोबर के सेल्युलोज में छिपी सुंदरता दुनिया को दिखानी ही होगी। एसाइदी फिलहाल 15 किसानों के साथ इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। एसाइदी की इसी साल औद्योगिक स्तर पर मैन्योर रिफाइनरी यूनिट शुरू करने की योजना है।

गाय के गोबर से बनी ड्रेस का प्रदर्शन करती एक मॉडल

गोबर से बने फैब्रिक का नाम है ‘मेस्टिक’

जलिला एसाइदी बताती हैं, ‘गाय के गोबर के सेल्युलोज से जो फैब्रिक बनाया जा रहा है, उसे ‘मेस्टिक’ नाम दिया गया है। फैब्रिक बनाने में शुरुआती स्तर पर जो तेल इस्तेमाल होता है, वह भी बहुत अच्छा नहीं होता लेकिन इसके बावजूद हमने गोबर के सेल्युलोज से फैब्रिक बनाने में सफलता हासिल की है। फिलहाल इससे शर्ट और टॉप तैयार किए जा रहे हैं।’ उन्‍होंने बताया कि उनके स्टार्टअप ने गोबर के सेल्युलोज से बायो-डीग्रेडेबल प्लास्टिक और पेपर बनाने में भी कामयाबी हासिल की है। उनके इस इनोवेशन को दो लाख डॉलर (1.40 करोड़ रुपये) का ‘चिवाज वेंचर एंड एचएंडएम फाउंडेशन ग्लोबल अवॉर्ड’ भी मिला है।

कैसे बनाते हैं गोबर से फैब्रिक ?

जलिला एसाइदी बताती हैं, ‘कैमिकल और मैकेनिकल प्रॉसेस से सेल्युलोज बनाया जाता है। हमें जो गोबर और गोमूत्र मिलता है, उसमें 80% पानी होता है। इसमें से गीले और सूखे हिस्से को अलग किया जाता है। गीले हिस्से के सॉल्वेंट से सेल्युलोज बनाने के लिए फर्मेंटेशन होता है। इसमें ज्यादातर हिस्सा घास और मक्के का होता है, जिसे गाय खाती है।’ वे बताती हैं, ‘सामान्य कपड़ा उद्योग से हमारी प्रक्रिया कहीं बेहतर है, क्योंकि गाय के पेट से ही फाइबर के नरम बनने की शुरुआत हो जाती है। इस प्रक्रिया में ऊर्जा की बचत भी होती है।’ वैज्ञानिकों का भी मानना है कि इस प्रक्रिया से मिला सेल्युलोज उच्च तकनीक वाला होता है।

प्रकृति के संरक्षण में सहायक 

क्लोदिंग रिटेलर एचएंडएम फाउंडेशन के कम्युनिकेशन मैनेजर मालिन बोर्न का कहना है कि दुनिया हर साल जरूरत से ज्यादा प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रही है, इसलिए जल्द ही हमें ऐसा मॉडल चाहिए जहां जरूरी मटेरियल को रिकवर किया जा सके। ऐसे में सिर्फ कॉटन के भरोसे नहीं रहा जा सकता। कई कपड़ा निर्माताओं ने एसाइदी को भरोसा दिलाया कि वे ‘मेस्टिक’ से कपड़े बनाएंगे क्योंकि यह काफी किफायती है। प्रोजेक्ट से जुड़े किसानों ने भी कहा कि हम जब पूरे दिन गोबर के बीच रह सकते हैं तो इससे बने कपड़े पहनने में क्‍या हर्ज है।

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