ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने किया दावा – सुलझ गई बरमूडा ट्रैंगल की गुत्थी‍ !

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लंदन। दुनिया में एक बहुत ही रहस्यमय जगह है जिसका नाम है बरमूडा ट्रैंगल। यह वो इलाका है जिसके आस-पास से गुजरने वाली हर चीज़ रहस्यमय ढंग से अचानक ग़ायब हो जाती है। चाहे वो पानी का जहाज़ हो या हवाई जहाज़, बरमूडा ट्रैंगल के आस-पास जो भी गया, वो हमेशा के लिए ग़ायब हो गया। ये पता लगाने का बहुत प्रयास हुआ कि आखिर वहां ऐसा क्या है, जो किसी भी चीज को पलक झपके ही निगल लेता है। लेकिन अब ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि बरमूडा ट्रैंगल के रहस्‍यों को सुलझा लिया गया है।

क्‍या कहा ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने ?

ब्रिटिश वैज्ञानिकों का दावा है कि इस इलाके में उठने वाली 100 फीट ऊंची खतरनाक लहरें इसका कारण हो सकती हैं जिसके कारण समुद्री या हवाई जहाज इस रहस्‍यमय बरमूडा ट्रैंगल में पहुंचकर गुम हो जाते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैंपटन के समुद्र वैज्ञानिक साइमन बॉक्सल का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं कि ये इलाका ‘रोग वेव्स’ (rogue waves) की चपेट में आ जाता है। ‘रोग वेव्स’ दैत्‍याकार लहरें होती हैं जो विशाल आकार ले सकती हैं। ये लहरें ऐसी किसी भी जगह आ सकती हैं जहां कई तरह के तूफान आते हों। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रहस्‍य को प्राकृतिक प्रक्रिया, ‘खतरनाक लहरों’ के तौर पर बताया जा सकता है।

करीब 7 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है बरमूडा ट्रैंगल

क्‍या है बरमूडा ट्रैंगल ?

पूर्वी-पश्चिम अटलांटिक महासागर में फ्लोरिडा के मियामी, बरमूडा आईलैंड और प्योर्टो रिको के सैन जुआन के बीच स्थित पृथ्वी पर एक ऐसी जगह है जिसकी गहराई में हजारों रहस्य छिपे हैं। इसे ही दुनिया बरमूडा ट्रैंगल के नाम से जानती है। बरमूडा ट्रैंगल करीब 7 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह क्षेत्र भूमध्य रेखा के नजदीक है। बरमूडा ट्रैंगल ने पिछले 100 सालों में कम से कम 75 विमानों, 100 से ज्यादा छोटे-बड़े जहाजों को निगल लिया है जिसमें कम से कम 1000 लोगों की जान जा चुकी है। इसे ‘डेविल्‍स ट्रैंगल’ के नाम से भी जाना जाता है।

कैसे पता चला इसका ?

कहा जाता है कि सबसे पहले इसका पता 500 साल पहले कोलंबस ने लगाया था। जब कोलंबस का जहाजी बेड़ा इस इलाके में पहुंचा तो उनके कम्‍पास ने काम करना बंद कर दिया। रहस्यमय ताकतों से भरा ये बरमूडा ट्रैंगल 1609 में पहली बार तब चर्चा में आया, जब यहां से गुजर रहा अंग्रेज़ी जहाज ‘द सी वेंचर्स’ अचानक ग़ायब हो गया। इसके बाद तो तमाम विमान और पानी के जहाज़ समुद्र के इस हिस्से में आने के बाद हमेशा के लिए लापता हो गए। 5 दिसंबर, 1945 को अमेरिका की फ्लाइट-19 बरमूडा ट्रैंगल में गायब हो गई थी। फ्लाइट में सवार सभी 14 लोगों का कभी पता नहीं चला। बाद में इसकी खोज के लिए गई मार्टिन मेरिनर की नाव भी 13 लोगों समेत गायब हो गई थी। एक और प्लेन मेरी सेलेस्टी (Mary Celeste) भी वर्ष 1872 में  इसी क्षेत्र में लापता हो गया था।

कई तरह की थ्‍योरी

  • बरमूडा ट्रैंगल के रहस्य पर दुनिया में कई थ्योरी दी जाती रही हैं। कोई दावा करता है कि इस इलाके में भूतों से भरी जादुई दुनिया है तो कोई कहता है कि यहां हमेशा कोहरा छाया रहता है जिसकी वजह से यहां आकर जहाज खो जाते हैं।
  • ऐसी ही एक थ्योरी में कहा गया है बरमूडा ट्रैंगल की ताकत के पीछे एलियन हैं। उनका मानना है कि इस क्षेत्र में एलियंस की प्रयोगशाला है और वे यह नहीं चाहते कि इसका पता दुनिया के लोगों को लगे। यही कारण है कि यहां पहुंचने वाली चीजें अचानक गायब हो जाती हैं। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
  • इसी साल मार्च में नार्वे के कुछ वैज्ञानिकों ने कहा था कि बरमूडा ट्रैंगल वाली जगह पर समुद्र से मीथेन गैस का रिसाव हो रहा है, जिसकी वजह से वहां पानी में हमेशा हलचल होती रहती है। मीथेन गैस में कई बार विस्‍फोट भी होता है, जिससे खास तरह का ग्रेविटेशनल फोर्स बनता है, जो वहां आने वाली चीजों को अंदर खींच लेता है। हालांकि ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रयोग अभी तक नहीं हुआ है।
  • इससे पहले एक ऑस्‍ट्रेलियाई वैज्ञानिक ने बताया था कि बरमूडा ट्रैंगल का रहस्‍य वहां की भौगोलिक स्थिति और खराब मौसम में छिपा है। इसकी वजह से अटलांटिक महासागर के उस क्षेत्र में समुद्री जहाज और प्लेन गायब हो जाते हैं। उस क्षेत्र पर चुंबकीय घनत्व के प्रभाव की बात भी स्वीकार की गई है।

नासा के सैटेलाइट ने खींची रहस्‍यमय बादलों की तस्‍वीरें

वर्ष 2017 में नासा के सैटेलाइट ने अटलांटिक महासागर में स्थित बरमूडा ट्रैंगल के ऊपर मंडराते बादलों की तस्वीरें खींची हैं, जो इसके रहस्य से पर्दा हटा सकती हैं। बहमास और बरमूडा के बीच बादलों की तस्वीर देखने के बाद वैज्ञानिक चौंक गए, क्योंकि बरमूडा ट्रैंगल पर मंडराने वाले कुछ बादल आम बादलों से पूरी तरह अलग थे। सैटेलाइट तस्वीरों में साफ़ दिखा कि कुछ बादलों का आकार हेक्सागन यानी षटकोण जैसा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आमतौर पर बादलों का आकार ऐसा नहीं होता है।

बादलों के नीचे बहती हैं तूफानी हवाएं

वैज्ञानिकों के मुताबिक ये बादल बरमूडा आइलैंड के दक्षिणी छोर पर पैदा होते हैं और फिर करीब 20 से 55 मील का सफ़र तय करते हैं। बरमूडा के पास छह भुजाओं वाले (हेक्सागन) बादलों की सैटेलाइट तस्वीर से वैज्ञानिकों को पता चला कि षटकोण जैसे दिखने वाले इन बादलों के नीचे 274 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तूफ़ानी हवाएं चल रही थीं। ये तूफ़ानी हवाएं आसमान में 100 फीट ऊंची लहर या बवंडर बनाती हैं। जब ये समुद्र से टकराती हैं तो इनसे सुनामी आ जाती है। ये लहरें इतनी शक्तिशाली होती हैं कि आसपास मौजूद हर चीज़ को निगलने की ताक़त रखती हैं। वैज्ञानिकों ने इसे ‘एयर बॉम्ब’ नाम दिया है, यानी हवा से बना ऐसा बम जो रास्ते में आने वाली हर चीज़ को ध्वस्त कर देता है। उसका नामोनिशान मिटा देता है। मौसम वैज्ञानिक रैंडी कैरवेनी के मुताबिक, ये बादल ही बम विस्फोट जैसी स्थिति पैदा करते हैं जिससे इनके आस-पास की सभी चीज़ें बर्बाद हो जाती हैं।

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