अब मनमानी नहीं कर पाएंगी ई-कॉमर्स कंपनियां, सरकार बनाएगी जवाबदेह

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  • संसद के मॉनसून सत्र में उपभोक्‍ता संरक्षण विधेयक लाने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली। ई-कॉमर्स कंपनियों के बाबत उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों के बाद सरकार ने अब इन कंपनियों को लेकर सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है। सरकार मॉनसून सत्र में उपभोक्‍ता संरक्षण विधेयक लाने की तैयारी में है। जितनी तेजी से ऑनलाइन का बाजार बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इन कंपनियों के खिलाफ शिकायतें भी बढ़ी हैं। उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार,  पिछले एक साल में इन कंपनियों के खिलाफ शिकायतों के मामले 42 प्रतिशत बढ़ गए हैं।

तय होगी जवाबदेही

ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ बढ़ती शिकायतों को देखते हुए सरकार अब हर पहलू पर उनकी जवाबदेही तय करने जा रही है। इसके लिए सरकार ने लंबित उपभोक्ता संरक्षण विधेयक में नए निर्देश शामिल करने का फैसला किया है। मंत्रालय का मानना है कि ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए कोई नियामक नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं को पूरी राहत नहीं मिल पाती है। सरकार का मकसद 100 फीसदी शिकायतों का निपटारा करने का है। उल्लेखनीय है कि ई-कॉमर्स के खिलाफ वर्ष 2014 में 5,204; 2015 में 16,919; 2016 में 28,331; 2017 में 54,872 और मार्च 2018 तक 78,088 शिकायतें मिली थीं।

उपभोक्‍ताओं को क्‍या होगा फायदा ?

ऐसी शिकायतों को लेकर सरकार ने इसी साल जनवरी में उपभोक्ता संरक्षण विधेयक-2018 संसद में पेश किया था, जिसमें धोखाधड़ी, अनुचित व्यावसायिक गतिविधि और सामान की जिम्मेदारी सहित अन्य मुद्दे शामिल थे। हालांकि इसमें डिलीवरी में देरी, गलत माल भेजना, वापसी में होने वाली दिक्कत और उत्पाद बदलने में आनाकानी जैसे पहलू नहीं थे। इन पहलुओं को अब शामिल किया जाएगा और ई-कॉमर्स कंपनियों को उत्पाद के लिए जिम्मेदार बनाया जाएगा। इस कानून के लागू होने पर ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए सामानों की डिलीवरी, वापसी और बदलाव के लिए पारदर्शी नीति बनाना आवश्‍यक हो जाएगा, जबकि मनमाना रवैया अपनाने पर उन्हें आर्थिक दंड भी भुगतना होगा।

रजिस्‍ट्रेशन के नियम भी होंगे सख्त 

सरकार ई-कॉमर्स कंपनियों के रजिस्‍ट्रेशन के नियम भी सख्त बनाने जा रही है। रजिस्‍ट्रेशन से पहले कंपनी को पूरी जानकारी साइट पर देनी होगी। उपभोक्‍ताओं की शिकायतों के लिए एक डायरेक्ट नंबर भी मुहैया कराना होगा। यही नहीं, नए नियमों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया को भी बहुत आसान बनाया जाएगा, जिससे उपभोक्‍ताओं को कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

सामान लौटाना हो जाएगा आसान 

नए नियमों के तहत अब सिर्फ एक मेल आईडी पर शिकायत नहीं दर्ज होगी, बल्कि स्टेप बाई स्टेप कंज्यूमर कहां शिकायत करे, इसकी पूरी जानकारी देनी होगी। नए नियमों में टूटा हुआ सामान, गलत, नकली या जैसा विवरण वेबसाइट पर दिया था, वैसा सामान नहीं होने पर उपभोक्ता को उसे लौटाने का अधिकार होगा। ऐसे में उपभोक्ता को 14 दिन में रिफंड देना होगा। कंपनी को वेबसाइट पर सामान लौटाने की पॉलिसी भी प्रदर्शित करनी होगी। अगर कोई सामान जाली निकलता है या उसकी क्वालिटी ठीक नहीं तो यह ई-कॉमर्स और विक्रेता दोनों की जिम्मेदारी होगी। अभी तक कंपनियां यह कहकर पल्ला झाड़ लेती थीं कि वह सिर्फ प्लेटफार्म मुहैया कराती हैं, सामान की गुणवत्ता की उनकी जिम्मेदारी नहीं है।

उपभोक्ता को नुकसान पर मुआवजा भी

सरकार इस विधेयक में मुआवजे का भी स्पष्ट प्रावधान करने जा रही है, जो 2015 के विधेयक में स्पष्ट नहीं था। अगर उत्पाद इस्तेमाल करने पर उपभोक्ता को कोई नुकसान होता है या फिर उसकी मौत हो जाती है, तो इसके लिए व्यापारी, सेवा प्रदाता और विक्रेता से मुआवजे की मांग की जा सकेगी। बता दें कि मौजूदा विधेयक में अनुचित व्यावसायिक प्रक्रिया में गलतबयानी, भ्रामक विज्ञापन सहित 6 तरह की गतिविधियां शामिल हैं।

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