दो किलोमीटर तक फैलता और सिकुड़ता है सूरज !

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न्यूजर्सी। सूरज की ओर देखना आसान नहीं है। आग के इस गोले की ओर देखने से आंखों को नुकसान होता है। इसकी तेज रोशनी हमारी आंखों को चुंधिया देती  है। वहीं, चांद की रोशनी आंखों को चुभती नहीं। हम उसे घटता-बढ़ता देखते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि सूरज भी आकार में सिकुड़ता है !

कितना घटता और बढ़ता है सूरज ?

अमेरिका के नेवार्क स्थित न्यूजर्सी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और फ्रांस के निसे स्थित ज्यां पियरे रोजेलो ऑफ यूनिवर्सिते कोते द अजूर के शोधकर्ताओं के मुताबिक सूरज का व्यास भी कम और ज्यादा होता रहता है। उनके मुताबिक, 11 साल के अपने सोलर साइकिल के दौरान सूरज का व्यास एक से दो किलोमीटर कम हो जाता है। इस दौरान सूरज सबसे ज्यादा एक्टिव रहता है। बता दें कि सूरज का व्यास 7 लाख किलोमीटर है। ऐसे में इसमें एक से दो किलोमीटर कम हो जाने से ज्यादा पता नहीं चलता है।

ग्रहों की तरह ठोस नहीं है सूरज

बता दें कि सूरज अन्य ग्रहों की तरह ठोस नहीं है। वो हीलियम गैस का एक गोला है। यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के खगोलविद जेफ कुन हालांकि इससे इनकार करते हैं, लेकिन नए शोध में सूरज का व्यास कम होने का दावा किया गया है। शोध करने वालों ने इसके लिए बीते 21 साल के डेटा का इस्तेमाल किया है। उनके मुताबिक सूरज जब आकार में सिकुड़ता है, तो कम मैग्नेटिक फील्ड उत्पन्न होती है। जब ये फैलता है तो मैग्नेटिक फील्ड भी बढ़ जाता है।

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