गरीबी के आड़े नहीं आए सपने, कूड़ा उठाने वाले के बेटे को मिला AIIMS में एडमिशन

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परिंदों को मंजिल मिलेगी यक़ीननये फैले हुए उनके पर बोलते हैं

वो लोग रहते हैं अक्सर खामोश, ज़माने में जिनके हुनर बोलते हैं | 

 इन लाइनों पर खरे उतरे हैं मध्य प्रदेश के देवास में रहने वाले आशाराम चौधरी। आशाराम को जोधपुर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज (एम्स) में एमबीबीएस में एडमिशन मिला है। आशाराम ने ओबीसी श्रेणी में 707 और अखिल भारतीय स्‍तर पर 141वीं रैंक हासिल की है।

गरीबी नहीं आई आड़े

बता दें  कि आशाराम चौधरी अत्‍यंत ही गरीब परिवार से आते हैं। उनके पिता कूड़ा उठाने का काम करते हैं। अभावों में पले आशाराम ने कभी भी अपनी आर्थिक स्थिति को अपने लक्ष्‍य और सपनों के रास्‍ते में आड़े नहीं आने दिया।

झोलाछाप डॉक्‍टर से मिली प्रेरणा

आशाराम ने बताया कि  उन्‍हें डॉक्टर बनने की प्रेरणा उनके गाँव के एक झोलाछाप डॉक्टर से मिली, जब वह पाँचवी क्लास में पढ़ते थे। आशाराम ने अपनी सफलता पर ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा कि  इस सफलता के लिए वह अपने पैरेंट्स और नवोदय विद्यालय को धन्यवाद कहना चाहते हैं। साथ ही,  उन्‍होंने दक्षिणा संस्था को भी धन्यवाद दिया हैजिसने उनकी पैसे से मदद की।   

एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए पैसे की दरकार

आशाराम के पिता का कहना है, मेरे बेटे ने 12वीं की पढ़ाई पूरी की है और अब एम्स,  जोधपुर में दाखिला लिया है लेकिन अब हमारे पास आगे की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं हैं। मैं दूसरे मदद मांग रहा हूं। पहले भी उप-जिला अधिकारी और कुछ लोगों ने हमारी मदद की थी।

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