शुभ-अशुभ नहीं बल्कि आँख फड़कने के पीछे हैं ये साइंटिफिक रीज़न

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लखनऊ। आपने अक्‍सर सुना होगा कि आंखों का फड़कना या तो अच्छा होता है या फिर बुरा, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आंख फड़कने के पीछे कारण क्‍या है ? क्या कभी आपने यह भी सोचा है कि शुभ-अशुभ के अलावा  आंखें फड़कने से हमारे स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है ? आज हम आपको बता रहे हैं कि आंख फड़कने के पीछे वैज्ञानिक कारण क्‍या है –

  • आंखों के फड़कने को डॉक्टरों की भाषा  में ‘Myokymia’ कहा जाता है। जब आंखों की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं तो आंख फड़कने लगती है।
  • कभी-कभी ज्‍यादा काम के कारण काफी थकान हो जाती है, ऐसे में हमारा शरीर विभिन्न तरीकों से प्रतिक्रिया देता है। आंखों का फड़कना भी इनमें से एक तरीका है।
  • कम्प्यूटर पर ज्यादा देर काम करने से आंखों पर असर पड़ता है। साथ ही कभी-कभी हेवी डोज की दवाइयों के कारण, कॉन्टेक्ट लेंस पहनने और ज्‍यादा मात्रा में कैफीन लेने से भी आंखें ड्राई होने लगती हैं। इसकी वजह से भी आंखें फड़कती हैं।

  • जिन लोगों को नजरें कमजोर होती हैं, उनकी आंखों पर देखते समय अधिक जोर पड़ता है। इस वजह से भी आँख फड़क सकती है।
  • शराब का अधिक सेवन करने से भी आंखों पर असर पड़ता है और आंखें फड़कने लगती हैं।
  • जिन लोगों को आंखों से संबंधित एलर्जी है, उन्हें आँखों में खुजली, सूजन और पानी आना जैसी समस्याएं होती हैं। फिर जब वो उन्हें रगड़ते हैं तो पलकें भी फड़कने लगती है।

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